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सीतापुर की मशहूर दरी के धागों से बुनेगा वैश्विक बाजार का ताना-बाना, देश-विदेश के खरीदारों से जुड़ेंगे जिले के बुनकर

Published: Tue, 13 Oct 2026 09:47 PM (IST)

सीतापुर की सदियों पुरानी दरियों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए 24-25 अक्टूबर को क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें बुनकरों ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

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HighLights

  1. सीतापुर की दरियों को वैश्विक पहचान मिलेगी।

  2. बुनकर देश-विदेश के खरीदारों से जुड़ेंगे।

  3. डिजाइन, ब्रांडिंग, ऑनलाइन कारोबार का प्रशिक्षण।

संवाद सूत्र, सीतापुर। पीढ़ियों से हथकरघों पर बुनी जा रही जिले की दरियों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने की तैयारी है। बुनकरों और कुटीर उद्योगों को बड़े खरीदारों से जोड़ने के लिए 24 और 25 अक्टूबर को प्रशासन की ओर से एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) दरी क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित शिक्षण संस्थान किया जाएगा। इसमें देश-विदेश के खरीदारों के साथ व्यावसायिक बैठकें होंगी। साथ ही विशेषज्ञ बुनकरों और उद्यमियों को डिजाइन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ऑनलाइन कारोबार के गुर सिखाएंगे।

दरी बुनाई की परंपरा करीब 150 से 200 वर्ष पुरानी मानी जाती है। बिसवां, लहरपुर, महमूदाबाद, नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनकर परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं। हस्तनिर्मित गुणवत्ता, टिकाऊपन और आकर्षक डिजाइन के कारण यहां की दरियों की देश-विदेश में मांग है। यह उद्योग हजारों परिवारों की आजीविका का आधार भी है। सम्मेलन के जरिए स्थानीय उत्पादों को नए बाजार उपलब्ध कराने और बुनकरों के कारोबार का विस्तार करने पर जोर रहेगा।

24 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से सम्मेलन शुरू होगा। उद्घाटन के बाद दरी की प्रोफाइल प्रस्तुति होगी। इसके बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ बैठकें, नेटवर्किंग सत्र और व्यापारिक चर्चाएं होंगी। शाम को स्थानीय कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। 25 अक्टूबर को राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) और भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आइआइएफटी) के विशेषज्ञ डिजाइन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स पर तकनीकी सत्र आयोजित करेंगे। उद्यमियों को सूक्ष्म एवं लघु उद्योग (एमएसएमई) और क्लस्टर विकास से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी।

हस्तशिल्प को पर्यटन से जोड़ने की पहल
सम्मेलन में पारंपरिक दरी को नैमिषारण्य की आध्यात्मिक पहचान के साथ जोड़कर आर्थिक संभावनाओं को विस्तार देने का प्रयास होगा। सम्मेलन के समापन के बाद प्रतिभागियों को नैमिषारण्य तीर्थ का भ्रमण कराया जाएगा। खरीदारों और उद्यमियों के लिए पंजीकरण की व्यवस्था है। इच्छुक प्रतिभागी आधिकारिक क्यूआर कोड स्कैन कर पंजीकरण कर सकते हैं।

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