सीतापुर में फेको तकनीक बनी वरदान, 85 की उम्र में बिना चश्मे के अखबार पढ़ रहे गंगाराम
सीतापुर के आंख अस्पताल में फेको तकनीक मोतियाबिंद के मरीजों के लिए वरदान साबित हुई है। 85 वर्षीय गंगाराम 25 ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
फेको तकनीक मोतियाबिंद मरीजों के लिए वरदान साबित हुई।
85 वर्षीय गंगाराम 25 साल बाद भी बिना चश्मे के पढ़ते हैं।
सीतापुर आंख अस्पताल ने 100 वर्ष पूरे किए।
संवाद सूत्र, सीतापुर। आंख अस्पताल की फेको तकनीक मोतियाबिंद के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसका उदाहरण 85 वर्षीय गंगाराम हैं। हरगांव के अलावलपुर निवासी गंगाराम आज इस उम्र में भी बिना चश्मे के आराम से अखबार पढ़ रहे हैं। करीब 25 वर्ष पहले उन्हें मोतियाबिंद की समस्या हुई थी।
उन्होंने आंख अस्पताल में ऑपरेशन कराया, जो पूरी तरह निश्शुल्क हुआ था। अब वर्षों बाद भी बेहतर दृष्टि का लाभ मिलने पर वह अस्पताल की सेवाओं की सराहना करते हैं। आंख अस्पताल के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में गंगाराम ने अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में उपचार से उन्हें काफी लाभ मिला। यहां बड़ी संख्या में लोगों को आंखों की समस्याओं से राहत मिल रही है। रायपुर गांव की सूरतमती ने भी अपने विचार व्यक्त किए। 100 वर्ष पूरे होने पर अस्पताल को रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया। कार्यक्रम में पहुंचे लोगों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्र से आए हुए लोगों को सम्मानित किया गया।
