सीतापुर : राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी मुद्दों की घोषणा करना शुरू कर दी है। हर दल कोई न कोई लुभावने वादे कर रहा है। इन वादों का मतदाताओं पर कितना असर होता है, यह तो 10 मार्च को घोषित हो रहे परिणाम के बाद पता चलेगा। लेकिन, मतदाताओं ने इन पर अपनी बात रखनी शुरू कर दी है। कोई इनको सिर्फ चुनावी जुमला बता रहा है तो कोई काम की बात। हर व्यक्ति की बात अलग-अलग है। चुनाव परिणाम भले ही कुछ और हो। लेकिन, उसका व्यापक असर पड़ने वाला है। दस मार्च को जब परिणाम आएगा, तब इन घोषणाओं का व्यापक असर दिखाई देगा।

पूर्णागिरि नगर मुहल्ले में एकत्र हुए लोग चुनावी चर्चा कर रहे थे। अनिल मिश्र ने अपने साथियों से पूछा क्या लग रहा है चुनाव में इस बार किसका जोर रहेगा। इस पर किसी ने अपना मत खुलकर बताया तो किसी ने घुमा-फिराकर अपनी बात कही।

सरवन अवस्थी ने कहा कि पार्टियों ने अपनी-अपनी घोषणाएं और वादों की पोटली खोलनी शुरू कर दी है। कोई बिजली बिल को माफ करने तो कोई आधा करने की बात कह रहा है। इन सब बातों का असर चुनाव में पड़ना तय है। विवेक वर्मा ने कहा कि ऐसा नहीं है, मतदाता बहुत जागरूक हो गया है। ऐसे वादों का ज्यादा असर पड़ता नहीं है, क्योंकि लोगों को पता है कि यह सब केवल चुनावी जुमला है और कुछ नहीं।

अनिल भी अपनी बात को इस बीच रखते हुए कहते हैं। अभी किसी पार्टी का पूरा घोषणापत्र नहीं आया है। बहरहाल, जब घोषणापत्र आएगा तब चुनाव का असली स्वरूप दिखेगा। अभिषेक श्रीवास्तव का कहना है विकास और जनहित के मुद्दे ही चुनाव पर असर डालेंगे। लवलेश अवस्थी ने भी इस बात पर अपनी सहमति जताते हुए दस मार्च को सब साफ होने की बात कही।

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