सरैयां (सीतापुर) : पहला ब्लॉक क्षेत्र के अशरफपुर गांव के मूल निवासी मशहूर शायर एवं गीतकार डॉ. निर्मल दर्शन ने शनिवार रात आगरा के राधास्वामी सत्संग भवन में अंतिम सांस ली। अभी ये 48 साल के ही थे। लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। इनके परिवार में उनकी पत्नी और 4 साल की बेटी केसर है।

डॉ. निर्मल दर्शन की निधन की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। इनके निधन से साहित्य जगत में एक बड़े अध्याय का समापन हो गया है। अंतरराष्ट्रीय शायर डॉ. बेकरा आलमी (शिवबरनलाल वर्मा) के पुत्र डॉ. निर्मल दर्शन का जन्म लखीमपुर खीरी जिले के गोला गोकर्णनाथ में हुआ था। प्राथमिक शिक्षा बाराबंकी जिले के नेरी गांव में ननिहाल में प्राप्त की थी, जबकि उन्होंने महमूदाबाद के काल्विन इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट किया था। फिर उन्होंने उच्च शिक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय से हासिल की थी। डॉ. दर्शन ने वर्ष 2012 में एफएम रेनबो की आरजे व टीवी चैनल की न्यूज रीडर मोनिका चौहान को जीवन साथी बनाया था।

रिसर्च के लिए दान किया था शरीर

दिसंबर 2018 में कैंसर की जानकारी होने के बाद से उपचार शुरू हुआ लेकिन, डॉ. निर्मल ने अपनी खुशमिजाजी बरकरार रखी। अपने जीवित रहते ही डॉ. निर्मल दर्शन ने अपना शरीर मेडिकल छात्रों के रिसर्च के लिए दान कर दिया था। जिसके चलते रविवार को मेडिकल कॉलेज की टीम उनके शव को ले गई।

कई देशों में किया काव्यपाठ

डॉ. निर्मल दर्शन देश के विभिन्न प्रांतों में काव्य पाठ करने के साथ ही दूसरे देशों श्रीलंका व दुबई में भी काव्य पाठ कर चुके हैं। इन्होंने अंतरराष्ट्रीय कवि एवं शायरों मुनव्वर राना, राहत इंदौरी, डॉ. सुनील जोगी, डॉ. कुमार विश्वास, वसीम बरेलवी, खुमार बाराबंकवी, अनवर जलालपुरी आदि के साथ भी काव्य मंच साझा कर चुके हैं।

डॉ. निर्मल दर्शन की रचनाएं

हड़ा हड़ा कव्वा रे, बापू एक कमाने वाला सारा जग खव्वा रे, जो तुम मुझसे करते प्यार। तुम मांझी गीतों को गाते, मैं खेता पतवार पहले दिल को जलाया गया और फिर मुस्कराया गया। मुझको पहले सजा दी गई, फिर अदालत में लाया गया आदि मशहूर रहीं हैं।

शायर व गीतकार को मिले सम्मान

साहित्य श्री, स्वतंत्रता स्वर्ण जयंती सम्मान, नगर गौरव, युवारत्न सम्मान, युवा शिरोमणि, उर्मिलेश गजल सम्मान, सुर कला सम्मान व सारस्वत सम्मान आदि। शिष्य की मृत्यु खबर सुन गुरु स्तब्ध

महमूदाबाद : डॉ. निर्मल दर्शन के अंग्रेजी शिक्षक रहे विनोद गुप्त बताते हैं कि, उनका शिष्य बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा का धनी था। वह जो पढ़ता या जिससे एक बार मुलाकात करता था, उसको बखूबी याद कर लेता था। निर्मल दर्शन उस दौर में नाटकों और फिल्मों के डॉयलाग सुना करता था। वह पढ़ाई के दौर से ही गजलें-शायरी लिखने लगा था। मुझे याद है, एक बार संकटा देवी मंदिर के मंच पर उसने एक कविता 'हड़ा-हड़ा कौव्वा रे, बाप एक कमाने वाला..।' सुनाकर अपनी प्रतिभा का गजब प्रदर्शन किया था। उसकी ये कविता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुई थी। विनोद अपने शिष्य के निधन से बहुत दुखी हैं।

Posted By: Jagran

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