यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 15, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Ayodhya-Kashi की तरह नैमिष से भी शुरू होगी हवाई सेवा, हेलीपैड तैयार; इस जिले के लिए पहली उड़ान भरेगा हेलीकॉप्टर
Sitapur Naimisharanya | सीतापुर का नैमिषारण्य अयोध्या और काशी की तरह हवाई सेवा से जुड़ने के लिए तैयार है। यहां ...और पढ़ें

HighLights
- अयोध्या, काशी की तरह नैमिषारण्य से भी हवाई सेवा, बढ़ेगा पर्यटन
- नैमिषारण्य में हेलीपोर्ट बनकर तैयार, हेलीकॉप्टर का इंतजार
- निदेशालय स्तर से एविएशन कंपनी तय होने के बाद सुगम होगी तीर्थयात्रा
जागरण संवाददाता, सीतापुर। अयोध्या, काशी की तरह तीर्थनगरी नैमिषारण्य भी हवाई सेवा से जुड़ने जा रही है। हेलीपोर्ट बनकर तैयार हो गया है। इसका संचालन ट्रिपल पी मॉडल पर किया जाएगा। इसे लेकर पर्यटन विभाग की ओर टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
एविएशन कंपनी तय होते ही हेलीकॉप्टर पहली उड़ान अयोध्या के लिए भरेगा। साथ ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं को तीर्थनगरी के दर्शन में सुगमता होगी। दक्षिण भारतीय से बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इससे पर्यटन भी बढ़ेगा।
देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु
आध्यात्मिक विरासत संजोए इस पावन धरा के स्वर्णिम भविष्य में हवाई सफर की शुरुआत का नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। नैमिष में हेलीपोर्ट बनकर तैयार हो गया है। पौराणिक तीर्थ नैमिषारण्य में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन करने आते हैं।
यहां प्रवास कर तमाम श्रद्धालु श्रीमद्भागवत कथा व सत्य नारायण व्रत कथा का श्रवण भी करते हैं। 88 हजार ऋषि-मुनियों की इस पावन तपोभूमि को योगी सरकार वैदिक सिटी के रूप में विकसित करा रही है। नैमिष दर्शन को सुलभ बनाने के लिए इसे हवाई मार्ग से जोड़ने की योजना अब साकार होने जा रही है।
ठाकुरनगर-रुद्रावर्त धाम मार्ग के किनारे दो हेक्टेयर भूमि पर लगभग नौ करोड़ रुपये की लागत से हेलीपोर्ट बनकर तैयार है। नैमिष में एक साथ तीन हेलीकाप्टर उतारने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए हेलीपोर्ट पर तीन हेलीपैड बनाए गए हैं। यहां से अयोध्या, बनारस आदि धार्मिक स्थलों से भी नैमिष को हवाई मार्ग से जोड़ा जाएगा।
पांच व सात सीटर होंगे हेलीकॉप्टर
हेलीपैड से जो भी हेलीकॉप्टर उड़ान भरेंगे, वे पांच या सात सीटर होंगे। हवाई सफर के लिए टिकट की एडवांस बुकिंग होगी। लखनऊ की कंपनी उड़ान का समय निश्चित करेगी। तय समय पर नैमिष से हेलीकाप्टर उड़ान भरेगा। बाहर से नैमिष पहुंचने वाले हेलीकाप्टरों पर भी यही प्रक्रिया लागू होगी।
हेलीपोर्ट पर मिलेंगी यह सुविधाएं
हेलीपोर्ट में एक टर्मिनल बिल्डिंग बनाई गई है, जिसमें वीआईपी के बैठने के लिए एक रूम है। इसके अलावा एयर ट्रैफिक कंट्रोल यानी एटीसी व हैंगर बिल्डिंग का निर्माण किया गया है। इसमें पार्किंग स्थल बनाया गया है। चारों तरफ हरियाली के लिए पेड़ पौधे लगाए जाने हैं। पर्यटन आफिस, कैफे एरिया, टिकट काउंटर के अलावा मुख्य मार्ग से हेलीपैड तक सीसी रोड बनाई गई है। इस मार्ग के दोनों तरफ लाइटें लगाई गई हैं।
मनु-सतरूपा ने की थी तपस्या
सतयुग में मनु-सतरूपा ने नैमिष में 23 हजार वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान श्रीहरि ने उन्हें दर्शन दिए थे। मनु-सतरूपा ने भगवान श्रीहरि को पुत्र रूप में पाने का वरदान मांगा, इस पर श्रीहरि ने त्रेता युग में रामावतार लेने का वरदान उन्हें दिया था। त्रेता में मनु राजा दशरथ व सतरूपा रानी कौशल्या के रूप में जन्मीं थी।
हेलीपोर्ट बनकर तैयार हो गया है। निदेशालय से एविएशन एजेंसी को तय करने की कवायद चल रही है। शीघ्र ही नैमिषारण्य से हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो जाएगी।
-कल्याण सिंह, उपनिदेशक पर्यटन
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