सीतापुर : जिले में स्वास्थ्य विभाग की सेहत बिगड़ती नजर आ रही है। हालात यह है कि अस्पतालों को दवाएं चाहिए, लेकिन उन तक दवाएं नहीं पहुंच रहीं। नतीजा जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी व पीएचसी तक जीवन रक्षक दवाओं का टोटा है। इससे लोग मेडिकल स्टोर का रुख कर रहे हैं।

जिले की पचास लाख की आबादी की सेहत दुरुस्त रखने के लिए जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के अलावा 20 सीएचसी व कस्बों तक पीएचसी व एएनएम सेंटर खोले गए हैं। स्वास्थ्य केंद्रों की इमारत देखने से लगता है कि यहां तो गली-गली तक सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं लोगों की सेहत का ख्याल रख रही हैं। हकीकत से सामना होता है, तो तस्वीर बिल्कुल उलट है। पीएचसी व सीएचसी की कौन कहे, यहां तो जिला अस्पताल में ही दवाओं का संकट है। जिला अस्पताल का हाल यह है कि यहां पर पैरासिटामॉल जैसी दवा का टोटा है। बताया जा रहा है कि बाजार से खरीद कर दवा मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही है। हृदय रोग, विटामिन की टेबलेट व कैप्सूल हों, आंख का रोग हो, ब्लड प्रेशर बढ़ा हो आदि रोगों के लिए दवाएं अस्पताल में मौजूद ही नहीं हैं। कहने को 109 दवाओं की लिस्ट का नाम लिखकर बोर्ड इमरजेंसी के सामने ही लगा रखा है, लेकिन इनमें 20 से अधिक दवाएं मौजूद ही नहीं हैं। अस्पताल परिसर में ही जन औषधि केंद्र खोला गया है। जिसमें सस्ती दवाओं का हवाला देकर मरीजों के पर्चे पर दवा भी लिखी जा रही है। लेकिन वहां भी अधिकांश दवाएं नहीं मिलती। कुल मिलाकर इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचने वाला मरीज दवा के मामले में इन दिनों सफर कर रहा है। मरीजों का हाल

जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 3 हजार मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। जबकि इमरजेंसी मे 10 से 12 की संख्या में बुखार से ऐसे गंभीर मरीज पहुंच रहे हैं, जिनको भर्ती ही करना पड़ता है। ऐसे में दवाओं की कमी मरीजों की जान का दुश्मन बन रही है। दूर होगी दवाओं की कमी :

जिले के स्टोर में दवाएं मौजूद हैं, वहीं दवा कंपनियों को भी डिमांड भेजी गई है। इस सीजन में सभी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ी है। सभी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। आरके नैयर, सीएमओ

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