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सीतापुर जिले के 170 गांवों में बढ़ेगी जमीन की मांग, गोमती तटबंध से आर्थिक विकास को मिलेगी गति

Published: Wed, 07 Oct 2026 07:41 PM (IST)

लखनऊ के फैजुल्लागंज से नैमिषारण्य तक गोमती पर बनने वाला तटबंध 170 तटवर्ती गांवों की आर्थिक तस्वीर बदल देगा। इससे ...और पढ़ें

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HighLights

  1. 170 तटवर्ती गांवों की आर्थिक तस्वीर बदलेगा गोमती तटबंध।

  2. आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों का होगा विस्तार, बढ़ेगी जमीन की मांग।

  3. नैमिषारण्य तीर्थाटन से जुड़े निवेश को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार सृजन।

दुर्गेश द्विवेदी, सीतापुर। लखनऊ के फैजुल्लागंज से नैमिषारण्य तक गोमती पर मार्गयुक्त तटबंध की योजना सिर्फ बाढ़ से राहत और आवागमन सुधारने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि करीब 170 तटवर्ती गांवों की आर्थिक तस्वीर भी बदल जाएगी।

गोमती की बाढ़, जलभराव और खराब संपर्क के कारण जिन गांवों में लोग जमीन खरीदने में रुचि नहीं दिखाते थे। तटबंध और बेहतर सड़क संपर्क के चलते जमीन की मांग बढ़ जाएगी। राजधानी लखनऊ से नैमिषारण्य का सीधा जुड़ाव होने से इन गांवों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार होगा।

नैमिषारण्य में लगातार बढ़ रहे तीर्थाटन को देखते हुए होटल, धर्मशाला, भोजनालय, दुकान, पार्किंग और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आसपास जमीन की जरूरत बढ़ रही है। अब इन गांवों की जमीन निवेशकों को आकर्षित करेगी।

फैजुल्लागंज से नैमिषारण्य के बीच घैला, अंबरपुर, बेरसापुर, सलेमपुर, हमीरपुर, अकबरपुर रेवान, कटाइन, पटिया, हिंदौर, तेरवा, कुर्सी, अल्लीपुर, बालपुर, इस्माइलगंज, मझरी, पारा, छूला, गइथा, गोपालपुर, रामपुर, महेशपुर, गांगूपुर, कुंवरपुर, ककरघटा, रामसाला, पनरभू, बेखनापुर, पनाहनगर, दोहारी, ततरोई, गयावर व भैरमपुर आदि गांव आते हैं।

गोमती के किनारे बसे इन गांवों में बाढ़ के साथ ही बलुई मिट्टी भी किसानी व जमीन के अन्य उपयोग को प्रभावित करती है। ऐसे में यहां की जमीन के भाव अन्य स्थानों से काफी कम है। तटबंध और बेहतर संपर्क बनने के बाद जमीन की उपयोगिता बढ़ने पर भाव में भी बदलाव आएगा। साथ ही बेहतर सड़क संपर्क पहुंचने से स्थानीय बाजार, परिवहन, रोजगार और छोटे कारोबार को भी गति मिलेगी।

दो से ढाई लाख रुपये बीघा बिकती जमीन

ततरोई के सरोज, अकबरपुर के मुस्ताक, ककरघटा के श्यामलाल व संजय आदि ने बताया कि तटवर्ती गांवों में जमीन का भाव दो से ढाई लाख रुपये प्रति बीघा तक है। उन्होंने बताया कि जब से मूंगफली और सरसों के अलावा अन्य फसल की पैदावार भी अच्छी नहीं होती। मूंगफली की खेती तो तकरीबन बंद ही हो गई है।

गोमती को कूल रिवर की संज्ञा दी जाती है। ऐसे में इसके किनारे रिजार्ट के लिए मुफीद है। नैमिषारण्य में 200 करोड़ रुपये की लागत से एक रिजार्ट विकसित भी हो रहा है। तटबंध बनने से इसी तरह से अन्य निवेश के आने भी संभावना भी बढ़ेगी।

-संजय भंडारी, जिला पर्यटन अधिकारी