सीतापुर : माघ मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी के रूप में जानी जाती है। इस मौके पर महिलाएं घरों में भगवान गणेश की पूजा करती हैं। इस चतुर्थी का व्रत रखने से सब तरह के संकटों से छुटकारा मिलता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

संकष्टी चतुर्थी की तैयारियों को लेकर गुरुवार को बाजार में काफी भीड़ रही। महिलाएं खरीदारी करती नजर आई। बाजार में तिल, लाई से बने लड्डू बिकते नजर आए। तिल से बने पकवानों से घरों में महिलाएं पूजन करती हैं और परिवार की सुख शांति व लंबी आयु क कामना करती हैं। त्योहार को लेकर बाजार में काफी चहल पहल रही।

पूजा का महत्व

माता पार्वती के पुत्र गणपति को पूरी दुनिया में प्रथम पूजनीय का दर्जा प्राप्त है। कोई भी शुभ कार्य के लिए सबसे पहले गणेश जी की ही आराधना की जाती है। गणेश जी संकटमोचन, विघ्नहर्ता हैं। गणेश जी का व्रत बहुत फलदायी होता ह , यह हर चत र्थी को रखा जाता है। ¨हदू पंचाग के अनुसार हर महीने में दो चतुर्थी होती हैं। विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी प्रमुख हैं।

व्रत कैसे करें

माघ मास के कृष्ण पक्ष को आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी, माघी चतुर्थी या तिल चौथ कहा जाता है। वर्ष माह में यह सबसे बड़ी चतुर्थी मानी गई है। इस दिन फल, फूल, रोली, मौली, अक्षत, पंचामृत आदि से श्रीगणेश को स्नान कराकर विधिवत तरीके से पूजन किया जाता है। गणेश पूजन के दौरान धूप-दीप आदि से श्रीगणेश की आराधना करें। तिल-गुड़ के लड्डू, कंबल या कपड़े आदि का दान करें। जीवन के समस्त कष्टों का निवारण करने वाली संकष्टी गणेश चतुर्थी का ¨हदू धर्म में बहुत महत्व है। संतान सुख की प्राप्ति और उसकी लंबी आयु की कामना के लिए माताएं यह व्रत करती हैं।

Posted By: Jagran