सिद्धार्थनगर : बेसिक शिक्षा विभाग ने 38 फर्जी शिक्षकों को गत 23 अगस्त को बर्खास्त कर दिया। 19 दिन बाद भी फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज न हो सका। ध्यान सिर्फ 38 फर्जी शिक्षकों पर है। इन्हें कभी काउंसि¨लग का लाभ मिलता है तो कभी चोरी व रक्षाबंधन का। विभाग बार-बार दलील देता है कि कहां जाएंगे, यह फर्जी शिक्षक। सवाल यह है कि 38 से आगे उनका ध्यान नहीं है या वह जानकर भी अनजान हैं।

विभाग व पुलिस मामले को भले उलझाए पर जानकार भली भांति जानते हैं कि यहां लग्जरी वाहनों से शिक्षक यूं ही नहीं घूम रहे हैं। यह सिर्फ बढ़नी में नहीं, बल्कि जिले के सभी ब्लाकों में घूमते हैं। पचास हजार की पगार व दस लाख की गाड़ी से गुरुजी स्कूल पहुंचेंगे तो संदेह तो होगा ही, पर बेसिक शिक्षा विभाग की निगाह में सिर्फ 38 शिक्षक कसूरवार हैं। वह इनकी निगाहों में दोषी नहीं हैं, जिन्होंने इनके सत्यापन को हरी झंडी देकर सितंबर 2016 से वेतन रिलीज करा दिया। इस खेल से तंत्र में शामिल तमाम लोग कमा कर लाल हो जा रहे हैं, विभाग की निगाह में सिर्फ 38 व्यक्ति दोषी हैं। कुछ लोग तो इस पर भी सवाल खड़ा करते हैं कि जिले में नौकरी करने वाले कतिपय शिक्षक व कर्मचारी गोरखपुर व लखनऊ में आलीशान मकानों के मालिक बन गए हैं। उनकी अकूत कमाई जांच के घेरे में हैं। विभाग अभी तक 38 फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध भी मुकदमा नहीं दर्ज करा सका है। ऐसे में फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोग खुद के लिए सुरक्षा घेरा मजबूत करने में जुटे हैं।

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आखिर किस बात का क्रेडिट ले रहा विभाग

विभाग दावा करता है कि उसने 38 फर्जी शिक्षकों की जांच कराकर उनकी डिग्रियां फर्जी पाई। तब उनके विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई। ऐसे में बताना आवश्यक है कि वीरेन्द्र चौरसिया नामक एक व्यक्ति ने 68 तथाकथित शिक्षकों डिग्रियां संदेहास्पद बताई थी। उसने यह भी कहा था कि सभी ने एक साथ बीएड किया। एक साथ टीइटी की तैयारी की और वह एक साथ उत्तीर्ण हो गए। ऐसे में उनकी नौकरी संदेह के घेरे में है। यह तंत्र इतना मजबूत है कि प्रथम बार के सत्यापन में सभी पास भी हो गए। बावजूद इसके संबंधित व्यक्ति अड़ा रहा। दुबारा जांच में 38 की डिग्रियां फर्जी मिलीं। सवाल यह है कि बाहर के एक व्यक्ति को 68 शिक्षकों पर संदेह होता है। इसमें से 38 की डिग्री फर्जी निकलती है। आखिर विभाग ने खुद से क्या किया? ऐसे में जिले में 4276 पुराने शिक्षकों की भी जांच हो तो स्पष्ट है कि कोई चौका देने वाला नतीजा सामने आ सकता है।

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आखिर बदहाली का जिम्मेदार कौन

जनपद में कुल 2667 प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। इसमें दो लाख 87 हजार तीन सौ 86 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें से करीब पचास फीसदी बच्चों को मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, सांसद का नाम नहीं पता है। यह स्थिति सिर्फ इस वर्ष की नहीं, बल्कि हर साल की है। यहां परिषदीय विद्यालयों से प्रतिवर्ष करीब इसी संख्या से छात्र निकलते हैं। इसमें अपवादों को छोड़ दिया जाए तो आगे चलकर अधिकांश के समक्ष संकट रोजगार का रहता है। कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार फर्जी शिक्षक हैं।

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68 में अभी और मिलेंगे फर्जी

68 चिह्नित शिक्षकों में 38 को बर्खास्त किया जा चुका है। 11 की नियुक्ति ही नहीं हो सकी थी। चार के विरुद्ध कार्रवाई निवर्तमान बीएसए के समय में हो चुकी है। ऐसे में सिर्फ 15 शिक्षकों की ढंग से जांच होनी शेष है। अर्से से जिले में फर्जी शिक्षकों की जांच लंबित हैं। ऐसे में जांच एजेंसी को इस पर भी ध्यान देना होगा कि कोई जांच में रोड़ा तो नहीं अटका रहा है।

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अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों पर भी नहीं हुई कार्रवाई

बीएसए ने जनपद में ज्वाइन करते ही अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों पर भी संदेह जताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि कहीं न कहीं इनका संबंध फर्जी शिक्षकों से हो सकता है। जिले के सभी खंड शिक्षाधिकारियों से अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों की रिपोर्ट भी मांगी थी। कई की रिपोर्ट मुख्यालय आ चुकी है, पर अभी तक विभाग ने किसी का वेतन नहीं रोका है।

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जिले में कोई भी फर्जी शिक्षक नहीं बचेगा। आने के साथ ही कह दिया गया था कि फर्जी शिक्षक जनपद छोड़ दें। आधे से अधिक जिला छोड़कर जा चुके हैं। 38 व अन्य जो भी सीटें शेष रह जा रही हैं। इसके लिए रिपोर्ट किया जाएगा। इस पर अगली ज्वाइ¨नग होगी। वेतन व अन्य मद मिलाकर खुद का करीब एक लाख रुपये वेतन है। यह वेतन सिर्फ अपने लिए नहीं हैं। परिवार के दायित्वों का भी निर्वहन करना है। ऐसे में अभी तक खुद चौपहिया वाहन नहीं खरीद सका हूं। लग्जरी वाहन से चलने वाले तो संदेह के घेरे में रहेंगे ही।

राम ¨सह

बेसिक शिक्षाधिकारी

Posted By: Jagran