सिद्धार्थनगर: फर्जी धान खरीद मामले में जन सेवा संचालक विकास पुलिस के हत्थे जरूर चढ़ा, लेकिन मास्टरमाइंड रमेश गुप्ता पुलिस की पहुंच से दूर है। हालांकि, प्रशासन के पास मौजूद उसका वीडियो इकरारनामा यह साबित करता है कि उसकी पैठ कितनी मजबूत है।

डुमरियागंज तहसील के एसडीएम की विभागीय आइडी व पासवर्ड हैक हो जाते हैं और जानकारी तब होती है जब पूरा खेल समाप्त हो जाता है। आननफानन में मुकदमा जरूर हुआ। लोगों ने कहा कि विकास को मोहरा बनाया गया है। लेकिन इस खेल का कप्तान अभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। सचिव रमेश गुप्ता के पास हटवा, धनोहरी, चिताहीं, भरवटिया मुस्तहकम आदि क्रय केंद्रों की जिम्मेदारी थी। उनके द्वारा किसानों से नहीं बल्कि आढ़तियों से मन्नीजोत स्थित उसके निजी खाद-बीज गोदाम पर खरीद होती थी। यहीं से खरीदा गया धान क्रय केंद्रों के स्टाक में शामिल हो जाता था। सरकारी भुगतान के लिए एक फीसद कमीशन का लालच देकर खाताधारकों से उनका खाता नंबर लिया जाता था। जानकारों के अनुसार हरीश, हनुमान, अनिल, पुरुषोत्तम ऐसे खाताधारक हैं जिनके खाते में दो माह में लाखों की रकम आई और निकाली भी गई। अभी भी इनके खातों में 10-10 लाख रुपये से अधिक मौजूद हैं। खाताधारक घर छोड़कर फरार बताए जा रहे हैं। फत्तेपुर तप्पा करही के रामकुमार के नाम पर 1270 क्विटल, हरेश्याम 1655, विकास 1253, राधेश्याम 942, कृष्णचन्द्र 1620, अनिमेश 1570, हरीश के नाम पर 1571 क्विंटल धान खरीद गए हैं। इनमें से अधिकतर भूमिहीन हैं। ऐसे कितने लोगों से फर्जी तरीके से खरीद हुई यह जांच के बाद ही साबित होगा। एसडीएम त्रिभुवन ने कहा कि मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। सभी आरोपितों की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं। जांच चल रही है।

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