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सिद्धार्थनगर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र घोटाला: तत्कालीन सीएमओ और बोर्ड चिकित्सक जांच के घेरे में

Published: Mon, 14 Sep 2026 05:36 PM (IST)

दिल्ली पुलिस की फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र जांच में सिद्धार्थनगर स्वास्थ्य विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में है, जिसमें तत्कालीन ...और पढ़ें

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HighLights

  1. दिल्ली पुलिस फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों की जांच में सिद्धार्थनगर पहुंची।

  2. तत्कालीन सीएमओ और बोर्ड चिकित्सक भी अब जांच के घेरे में।

  3. मलेरिया विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक जयप्रकाश शुक्ला को हिरासत में लिया।

जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में दिल्ली पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सिद्धार्थनगर स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में आती जा रही है।

एमबीबीएस की काउंसिलिंग में लगाए गए जिले से जारी चार दिव्यांग प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम जांच कर रही है। इनमें एक प्रमाणपत्र जून और तीन जुलाई में जारी किए गए थे।

दो माह के भीतर जारी इन प्रमाणपत्रों की जांच के साथ तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी और दिव्यांगता की जांच करने वाले बोर्ड के चिकित्सकों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

यह है पूरा मामला

दिल्ली पुलिस ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपित को गिरफ्तार किया था। काउंसिलिंग में लगाए गए प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान सिद्धार्थनगर से जारी चार प्रमाणपत्र फर्जी मिलने पर पुलिस ने संबंधित लोगों से पूछताछ की। इसमें मलेरिया विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक जयप्रकाश शुक्ला का नाम सामने आया।

इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें भी हिरासत में लिया। दिल्ली पुलिस की टीम सीएमओ कार्यालय पहुंचकर एक कर्मचारी को अपने साथ ले गई। कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आने की चर्चा तेज हो गई है।

बोर्ड की संस्तुति के बाद जारी होता है प्रमाणपत्र

दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने के लिए शासन स्तर से निर्धारित प्रक्रिया है। सीएमओ कार्यालय से संबद्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम दिव्यांगता की जांच करती है। बोर्ड में हड्डी, ईएनटी और नेत्र रोग विशेषज्ञ शामिल होते हैं। चिकित्सकों की जांच के बाद रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जाती है। इसके बाद सीएमओ के मोबाइल पर ओटीपी जाता है।

ओटीपी दर्ज होने के बाद यूडीआईडी (यूनिक डिसेबिलिटी आईडेंटिटी) जारी होता है। इसी यूडीआईडी के माध्यम से प्रमाणपत्र की सत्यता और उसके जारी होने वाले स्थान का सत्यापन किया जाता है।

मूल लिपिक की जगह संबद्ध कर्मचारी के पास रहा यूजर आईडी

दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने वाले बोर्ड में लिपिक की भी तैनाती होती है। यहां मूल लिपिक के पद पर उपेंद्र गौड़ तैनात हैं। इसके बावजूद वरिष्ठ निरीक्षक मलेरिया जयप्रकाश शुक्ला को भी बोर्ड में संबद्ध किया गया था।

बताया जा रहा है कि बोर्ड का यूजर आईडी और पासवर्ड मूल लिपिक के पास न रहकर संबद्ध कर्मचारी के पास था। ऐसे में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

दिल्ली पुलिस की टीम कार्यालय आई थी और फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र मामले में एक कर्मचारी को अपने साथ ले गई है। मामले की जानकारी शासन और उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। दिल्ली पुलिस को जांच में पूरा सहयोग दिया जाएगा।

-डाॅ. संजय कुमार दोहरे, सीएमओ

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