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प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ा फर्जीवाड़ा, फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर साल्वर से दिलाते थे परीक्षा, कानपुर से 4 गिरफ्तार

Published: Mon, 24 Aug 2026 02:40 PM (IST)

कानपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर आरक्षित कोटे का लाभ दिलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। ...और पढ़ें

HighLights

  1. कानपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

  2. फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर आरक्षित कोटे का लाभ

  3. एसटीएफ ने चार आरोपितों को किया गिरफ्तार

जागरण संवाददाता, कानपुर। यूपी के कानपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा है। सचेंडी में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा कर नौकरी दिलाने वाले गिरोह का एसटीएफ और सचेंडी पुलिस ने राजफाश किया है। गिरोह स्वस्थ अभ्यर्थियों के फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर उन्हें दिव्यांग कोटे का लाभ दिलाता था। इसके बाद पेशेवर साल्वर व स्क्राइब (हेल्पर) की मदद से परीक्षा पास कराने का खेल चलता था।

बैंक प्रोबेशनरी आफिसर की प्रारंभिक परीक्षा के समय संदेह होने पर पुलिस व एसटीएफ ने बैंक के रिकवरी मैनेजर समेत चार लोगों को पकड़ा था।पूछताछ और तलाशी के बाद गिरोह के नेटवर्क का सोमवार को राजफाश हुआ है।

सचेंडी के भैलामऊ स्थित परीक्षा केंद्र पर बैंक पीओ की परीक्षा चल रही थी। परीक्षा में परीक्षार्थी अवनीश यादव के लिए स्क्राइब (हेल्पर )आशीष कुमार और अनुराधा कनौजिया के लिए राहुल कुमार सिन्हा पहुंचे थे। दोनों साल्वर के चयन में गड़बड़ी सामने आने पर एसटीएफ निरीक्षक ज्ञानेंद्र कुमार राय ने पूछताछ शुरू की।

परीक्षा केंद्र के बाहर राहुल कुमार सिन्हा ने अंकित सचान की ओर इशारा करते हुए बताया कि उसी ने उसे अनुराधा की जगह परीक्षा देने के लिए बुलाया था।जिसके बाद एसटीएफ ने अंकित के अलावा अवनीश यादव को भी हिरासत में लिया और चारों से अलग-अलग पूछताछ की।

पूछताछ में पता चला कि अवनीश यादव पूरी तरह स्वस्थ है और उसने एमए तक पढ़ाई की है। बावजूद इसके दिव्यांग कोटे का लाभ लेने के लिए उसने वर्ष 2025 में करीब एक लाख रुपये देकर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया था। प्रमाणपत्र बनवाने में मनोज कुमार यादव और शमशेर उर्फ शीलू सचान की भूमिका सामने आई है।

अवनीश के पास से दो मोबाइल,ड्राइविंग लाइसेंस और एमए भूगोल की अंकतालिकाएं और मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से जारी स्क्राइब अनुशंसा प्रमाणपत्र भी मिला। इससे पहले भी दो परीक्षाओं में उसने साल्वर (हेल्पर) की मदद ली थी लेकिन सफलता नहीं मिली। 22 अगस्त की परीक्षा में आशीष कुमार को उसका स्क्राइब (हेल्पर )बनाया गया था।इसके बदले 30 हजार रुपये का भुगतान हुआ था।

अवनीश के मोबाइल में 22 अगस्त को शमशेर सिंह के पेटीएम खाते में 30 हजार रुपये भेजे जाने के सुबूत भी मिले है।इसके अलावा उसके मोबाइल में सुरजीत कुमार और मनोज कुमार यादव से हुई बातचीत, प्रतियोगी परीक्षाओं के दस्तावेज और चैट भी मिली हैं।

वहीं, आशीष कुमार ने पूछताछ में बताया कि उसने इतिहास विषय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है और यूजीसी नेट की परीक्षा भी दी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ वह रुपये लेकर फर्जी दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए स्क्राइब (हेल्पर ) का काम करता था।

उसके मोबाइल से अलग-अलग परीक्षाओं के प्रवेश पत्र, स्क्राइब फार्म और अन्य दस्तावेज मिले।बैग से बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा का ई-प्रवेश पत्र और यूजीसी नेट जून 2026 का प्रवेश पत्र बरामद हुआ।

अंकित सचान ने पूछताछ में बताया कि वह इटारा बाजार स्थित ग्रामीण बैंक में रिकवरी मैनेजर है। अनुराधा कन्नौजिया से उसकी करीब सात वर्ष से दोस्ती है। कम मेरिट में दिव्यांग कोटे से नौकरी दिलाने के उद्देश्य से उसने वर्ष 2024 में 65 हजार रुपये देकर अनुराधा का दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया था।

अनुराधा के भाई के कहने पर झांसी के राहुल यादव के माध्यम से 22 अगस्त की बैंक पीओ परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए 10 लाख रुपये में सौदा हुआ था। एडवांस के रूप में 21 और 22 अगस्त को 10-10 हजार रुपये आनलाइन भेजे गए थे। उसे राहुल कुमार सिन्हा का मोबाइल नंबर मिला। अंकित के मोबाइल से दोनों भुगतानों के संदेश भी मिले। उसके पास से अनुराधा का आधार कार्ड आदि बरामद हुए।

राहुल कुमार सिन्हा के मोबाइल और आईपैड की जांच में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों से संबंधित जानकारी मिली। इसमें स्क्राइब फार्म, प्रवेश पत्र, प्रमाणपत्र और लेनदेन से जुड़ी बातचीत शामिल है।

पूछताछ में राहुल ने बताया कि वह दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ आनलाइन कोचिंग में पढ़ाता था। इसी दौरान वह ऐसे लोगों के संपर्क में आया, जो फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों को पेशेवर स्क्राइब (हेल्पर )उपलब्ध कराते थे। इसके बाद वह एकदिवसीय प्रतियोगी परीक्षाओं में दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए स्क्राइब के रूप में बैठने लगा।

राहुल ने बताया कि दिल्ली में रहने वाला राजू गुप्ता उसे दिव्यांग अभ्यर्थियों की जानकारी उपलब्ध कराता था। राहुल के खाते में राजू गुप्ता की ओर से दो और तीन हजार रुपये भेजे जाने के साक्ष्य मिले हैं।

जांच में शमशेर उर्फ शीलू सचान, मनोज कुमार यादव, सुरजीत कुमार, मनोरंजन, राजू गुप्ता, मनीष कुमार मिश्रा और राहुल यादव समेत कई अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस इनकी भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने अब तक कितनी प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा किया और कितने अभ्यर्थियों को इस नेटवर्क के जरिये परीक्षा में बैठाया गया।

डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया के एसटीएफ ने चकेरी निवासी अवनीश यादव,बिहार के मधुबनी निवासी आशीष कुमार ,बिहार के शेखपुरा के राहुल कुमार सिन्ह और बर्रा निवासी अंकित सचान को गिरफ्तार किया है । चारों के खिलाफ परीक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।