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अब पराली से मोटी कमाई करेंगे किसान, सिद्धार्थनगर में बनेगा बायोगैस प्लांट; 3 जिलों के लोगों को होगा फायदा

Published: Thu, 10 Sep 2026 07:00 AM (IST)

सिद्धार्थनगर के सकारपार में 123.23 करोड़ की लागत से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट लगेगा, जो पराली को हरित ऊर्जा और किसानों की आय का स्रोत बनाएगा।

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

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HighLights

  1. सिद्धार्थनगर में 123.23 करोड़ का CBG प्लांट स्थापित होगा।

  2. पराली से हरित ऊर्जा, जैविक खाद और किसानों की आय बढ़ेगी।

  3. वायु प्रदूषण घटेगा, स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

जितेन्द्र पाण्डेय, सिद्धार्थनगर। जिस पराली को अब तक किसान खेतों में बोझ समझकर जला देते थे, वही अब हरित ऊर्जा और अतिरिक्त आय का बड़ा स्रोत बनने जा रही है। बांसी तहसील के सकारपार क्षेत्र में भारत जीपीएस बायोएनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (बीजीबीपीएल) द्वारा 123.23 करोड़ रुपये की लागत से 15 टन प्रतिदिन (टीपीडी) क्षमता का कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित किया जाएगा।

कंपनी ने बुधवार को क्षेत्र के 15 किसानों के साथ करीब 20 एकड़ भूमि की लीज प्रक्रिया पूरी कर ली। यह परियोजना भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और जीपीएस समूह के 50-50 प्रतिशत संयुक्त उपक्रम के तहत विकसित की जा रही है।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रवि कुमार ने बताया कि प्लांट में प्रतिदिन लगभग 130 टन पराली और अन्य कृषि अवशेषों का उपयोग होगा। इससे रोजाना 15 टन सीबीजी गैस का उत्पादन किया जाएगा, जिसकी आपूर्ति बीपीसीएल के नेटवर्क के माध्यम से देशभर में होगी।

इसके अलावा प्रतिदिन 39 टन ठोस जैविक खाद और बड़ी मात्रा में तरल जैविक खाद भी तैयार होगी, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी। सिद्धार्थनगर उन जिलों में शामिल रहा है जहां धान कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय रही हैं।

ऐसे में यह परियोजना केवल औद्योगिक निवेश नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन, कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार कृषि अवशेषों से ऊर्जा उत्पादन का यह मॉडल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों और वैश्विक हरित अर्थव्यवस्था की अवधारणा के अनुरूप है। कंपनी अधिकारियों ने जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, उप निदेशक कृषि राजेश कुमार तथा जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक शिवशंकर के साथ बैठक कर भूमि लीज और परियोजना के क्रियान्वयन पर चर्चा की।

कंपनी ने प्रशासन को बताया कि परियोजना के लिए पर्याप्त पराली उपलब्ध है और इसके लिए किसानों के साथ दीर्घकालिक खरीद व्यवस्था विकसित की जाएगी। जिले में 30 किलोमीटर के दायरे में 4.18 लाख टन से अधिक धान अवशेष उपलब्ध होने का आकलन किया गया है।

पराली जलाने में देश में शीर्ष पर सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर पराली जलाने की घटनाओं के मामले में देश का बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। अप्रैल 2026 में 1 से 23 अप्रैल के बीच जिले में 3078 घटनाएं दर्ज हुईं, जो इस अवधि में देश में सर्वाधिक थीं। इससे पहले 19 अप्रैल तक भी जिले में 2843 घटनाएं दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई थी। ऐसे में सीबीजी प्लांट पराली को समस्या के बजाय आय और स्वच्छ ऊर्जा के स्रोत में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

तीन जिलों को होंगे ये बड़े लाभ

सकारपार में प्रस्तावित सीबीजी प्लांट का लाभ केवल सिद्धार्थनगर तक सीमित नहीं रहेगा। संतकबीरनगर और बस्ती के किसान भी अपनी पराली बेच सकेंगे। इससे खेतों में पराली जलाने की घटनाएं कम होंगी और वायु प्रदूषण घटेगा। किसानों को कृषि अवशेष का मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी अतिरिक्त आय बढ़ेगी।

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जैविक खाद की उपलब्धता बढ़ने से खेती की लागत कम होगी और मिट्टी की उर्वरा शक्ति सुधरेगी। परियोजना से परिवहन, संग्रहण और प्रसंस्करण क्षेत्र में स्थानीय रोजगार सृजित होंगे। स्वच्छ ईंधन उत्पादन से क्षेत्र राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और हरित अर्थव्यवस्था में भी योगदान देगा।

सीबीजी प्लांट जिले के लिए पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण परियोजना है। इससे कृषि अवशेषों का वैज्ञानिक उपयोग होगा, किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी और रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। प्रशासन परियोजना को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा।

                                                                           शिवशरणप्पा जीएन, जिलाधिकारी