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राम मंदिर आंदोलन से जन्मी 'राम कटोरी' का नया अवतार, अब 10 नए फ्लेवर में घुलेगी मिठास

Published: Thu, 10 Sep 2026 08:56 AM (IST)

1992 में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान जन्मी राम कटोरी मिठाई को सिद्धार्थनगर के कृष्णा कुमार ने 10 नए स्वादों ...और पढ़ें

HighLights

  1. राम कटोरी मिठाई का जन्म 1992 के राम जन्मभूमि आंदोलन से हुआ।

  2. सिद्धार्थनगर में कृष्णा कुमार ने इसे 10 नए स्वादिष्ट फ्लेवर दिए।

  3. एक माह में 300 किलो से अधिक ऑर्डर, बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण।

जितेन्द्र पाण्डेय, सिद्धार्थनगर। कुछ मिठाइयां केवल स्वाद की पहचान नहीं होतीं, उनके साथ समय, स्मृति और भावनाएं भी जुड़ी होती हैं। बर्डपुर में वर्ष 1992 में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान जन्मी राम कटोरी ऐसी ही मिठाई है। तीन दशक से अधिक पुरानी इस मिठाई को अब शहर के कृष्णा कुमार ने नए प्रयोग के साथ नया रूप दिया है।

पारंपरिक राम कटोरी को 10 अलग-अलग स्वादों में तैयार किया गया है। प्रयोग शुरू हुए अभी एक माह ही हुआ है और इस दौरान 300 किलो से अधिक का आर्डर मिल चुका है।

एक जिला एक व्यंजन में शामिल राम कटोरी की कहानी भी अपने आप में खास है। वर्ष 1992 में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े बर्डपुर निवासी विनोद मोदनवाल को आंदोलन के दौरान गिरफ्तार कर बस्ती जेल भेजा गया था। वहां करीब 21 दिन रहने के दौरान उनके मन में कटोरी के आकार की मिठाई बनाने का विचार आया। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने इस विचार को आकार दिया। कटोरी जैसी आकृति वाली मिठाई का नाम उन्होंने राम कटोरी रखा।

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खोया, दूध और घी से तैयार होने वाली यह मिठाई धीरे-धीरे स्थानीय बाजारों में लोगों की पसंद बन गई। समय के साथ बदलती पसंद को देखते हुए कृष्णा कुमार ने इसी पुराने स्वाद को नए रूप में प्रस्तुत करने का प्रयोग किया। राम कटोरी को 10 स्वादों में तैयार किया गया है।

इसे आकर्षक पैकिंग में भी उपलब्ध कराया जा रहा है। डिब्बे के पीछे राम कटोरी के जन्म की कहानी अंकित है, जबकि सामने श्रीराम मंदिर का चित्र दिया गया है। इससे मिठाई का डिब्बा स्वाद के साथ उस घटना की स्मृति भी लोगों तक पहुंचाता है, जिसने इसे जन्म दिया था। धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर इसे श्रद्धा के भाव से भी देखा जा रहा है।


इन स्वादों में उपलब्ध है राम कटोरी
केसरिया, पिस्ता, बादाम, काजू, इलायची, गुलाब, चाकलेट, आम, नारियल और रबड़ी।

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परंपरा को नये प्रयोग से जोड़ रही मिठाई
नए प्रयोग को मिले लोगों के स्नेह का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक माह में ही 300 किलो से अधिक का आर्डर मिल चुका है। बस्ती, अयोध्या और संतकबीरनगर से नए स्वाद वाली राम कटोरी की मांग सामने आई है। स्थानीय मिठाई को नए स्वरूप में प्रस्तुत करने का यह प्रयास अब आसपास के जिलों तक पहुंच बनाने लगा है। राम कटोरी की यह यात्रा परंपरा को नए प्रयोग से जोड़ने की कहानी है। वर्ष 1992 में एक विचार के रूप में जन्मी मिठाई आज बदलते स्वाद के अनुरूप नया रूप ले रही है, लेकिन उसका मूल नाम और उससे जुड़ी भावनात्मक पहचान बरकरार है।

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