सिद्धार्थनगर : किसानों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। कहीं बाढ़ ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया तो जहां सैलाब का प्रभाव नहीं रहा वहां धान की फसल में लग रहे हल्दिया रोग के प्रकोप ने किसानों को चितित कर दिया। कृषि विज्ञानियों के अनुसार रोग से काफी नुकसान होता है, समय रहते इस पर नियंत्रण होता है तो 90 फीसद तक उत्पादन में गिरावट आ जाती है।

इधर कई वर्षों से इस क्षेत्र में हल्दिया रोग प्रकोप का देखा जा रहा है। इधर फिर कुछ क्षेत्रों में फसल में ये रोग लगना शुरू हो गया है। कृषि विज्ञानी डा. मारकण्डेय सिंह का कहना है कि यह मौसम रोग फैलने के लिए अनुकूल माना जाता है, इसलिए किसानों को समय रहते सचेत रहने की आवश्यकता है। थोड़ी सी लापरवाही उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। सतर्कता बरतने के साथ किसानों को खेतों का निरीक्षण करते रहना चाहिए।

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लक्षण

यह रोग बालियों में दुग्ध अवस्था पर दिखाई देता है। प्रमुख लक्षण हैं कि दानों के साथ भूरी गाठें बन जाती हैं और दो दिन बाद यह फुटकर पीले रंग का पाउडर बनकर पौधों पर फैल जाता है। पाउडर हवा के साथ उड़कर दूसरे पौधों को भी रोग ग्रसित कर देता है।

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रोग का नियंत्रण के उपाय

कृषि विज्ञानी मारकण्डेय सिंह का कहना है कि विगत वर्ष जिस खेत में इस रोग के प्रकोप हुआ था और इस बार भी लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो फसल के बचाव के लिए प्रापिकानाजोज 25 फीसद दवा को 500 एमएल प्रति हेक्टेयर अथवा टेबुकोनाजोल 50 फीसद 250 एमएल प्रति हेक्टेयर दो बार छिड़काव करें। प्रथम बार छिड़काव बाली निकलने के पहले और दूसरा छिड़काव 50 फीसद बालियां निकल जाने के बाद करें।

Edited By: Jagran