यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 28, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
एक मदरसा, जहां बडी संख्या में पढते हैं हिंदू छात्र
सिद्धार्थनगर जनपद के सदर विकास खंड के मैनहवा स्थित एक मदरसा ऐसा है जो अपने नए प्रयोग की वजह से हिंदू छात्रों में भी खासा लोकप्रिय है।

सिद्धार्थनगर (शैलेश उपाध्याय)। एक तरफ जहां संस्कृत और उर्दू पढ़ने को लेकर सरकार एवं संस्थाएं लोगों को जागरूक करने में लगी हैं, वहीं सिद्धार्थनगर जनपद के सदर विकास खंड के मैनहवा स्थित एक मदरसा ऐसा है, जो अपने नए प्रयोग की वजह से हिंदू छात्रों में भी खासा लोकप्रिय है। इस मदरसे में मुस्लिम छात्रों के साथ हिंदू छात्र भी बड़ी संख्या में उर्दू पढ़ रहे हैं। यहां बच्चों को उर्दू व फारसी के अलावा हिंदी, अंग्रेजी, गणित व विज्ञान आदि विषयों की तालीम दी जा रही है।
मदरसे का नाम जेहन में आते ही आम जन के मानस पटल पर जो तस्वीर उभरती है, वह उर्दू-अरबी की पढ़ाई एवं दीन-ए-इस्लाम की तालीम से जुड़ी होती है। हालांकि तमाम प्रगतिशील मुसलमानों का मानना है कि कौम की तरक्की और खुशहाली के लिए दीन के साथ ही दुनियावी तालीम भी जरूरी है। बगैर इसके तरक्की की उम्मीद करना बेमानी है।
तमाम मदरसों ने तो इस दिशा में पहल भी शुरू कर दी है। वह उर्दू-अरबी के अलावा विज्ञान, गणित व अंग्रेजी आदि विषयों की भी तालीम बांट रहे हैं। उनकी इस पहल से जो ताजा-तरीन तस्वीर उभर कर सामने आ रही है, वह काफी दिलचस्प होने के साथ ही काबिले तारीफ भी है।
उर्दू व अरबी सहित दीनी तालीम की रोशनी लुटाने के लिए यहां दो मौलाना व दुनियावी तालीम देने के लिए तीन अन्य अध्यापकों की तैनाती की गई है। इस मदरसे के सदर मौ. मुश्ताक अहमद फैजी स्वयं भी यहां पढ़ने वाले बच्चों से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। वह खुद ही बच्चों को पढ़ाने में जुटे रहते हैं। यह उनके लगन की ही देन है जो यहां धीरे-धीरे गैर मस्लिम छात्रों की तादात में इजाफा हो रहा है।
इस मदरसे में कुल करीब 174 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिसमें करीब 20 फीसद हिंदू छात्र हैं, जो यहां हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञान आदि विषयों की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कुछ तो ऐसे भी हिंदू छात्र हैं, जो इन सबके साथ उर्दू भी सीख रहे हैं। कक्षा एक से आठ तक संचालित होने वाले इस मदरसे में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है।
इसकी दूसरी बड़ी विशेषता यह है कि विषयों की पढ़ाई के साथ-साथ यहां सामान्य ज्ञान का भी पाठ बच्चों को पढ़ाया जाता है। अपनी इन्हीं सब विशेषताओं के कारण इस मदरसे ने अपनी एक अलग पहचान कायम की है।
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मदरसे से जुड़े मो. मुश्ताक अहमद फैजी कहते हैं, 'हम बिना किसी भेदभाव के सभी बच्चों को अच्छी तालीम देने की कोशिश में लगे रहते हैं। मुस्लिम बच्चों के लिए उर्दू के साथ-साथ दीनी तालीम जरूरी है, जबकि गैर मुस्लिम बच्चों के लिए यह उनकी इच्छा पर निर्भर करता है। जो उर्दू पढऩे के शौकीन हैं, उनको इसकी तालीम दी जाती है, अन्यथा वह हिंदी, अंग्रेजी व अन्य विषयों की शिक्षा ग्रहण करते हैं।'
