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श्रावस्ती में आपदा दे गई गहरे जख्म, खेतों में सड़ रही किसानों की उम्मीद

Published: Sun, 11 Oct 2026 05:31 PM (IST)

मानसून की विदाई से पहले श्रावस्ती के इकौना में आंधी-बारिश ने किसानों की धान, गन्ना और केले की फसलें बर्बाद ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. इकौना में आंधी-बारिश से धान, गन्ना, केला बर्बाद।

  2. खेतों में पानी में डूबी फसलें सड़ने से किसान चिंतित।

  3. किसान मुआवजे की आस में, प्रशासन पर आकलन में देरी।

संवाद सूत्र, इकौना(श्रावस्ती)। मानसून विदा हो रहा है, लेकिन जाते-जाते किसानों के लिए तबाही के निशान छोड़ गया। एक पखवारे के भीतर दो बार आए आंधी-बारिश ने खेतों में खड़ी धान, गन्ना व केले की फसल को जमीन पर बिछा दिया। अधपकी धान की बालियां पानी में डूबी हैं और सड़ती फसल के साथ किसानों की उम्मीदें भी दम तोड़ रही हैं। पेड़ और अन्य संसाधनों को हुए नुकसान के बीच अन्नदाता अब मुआवजे की आस लगाए हैं।

प्राकृतिक आपदा का यह मंजर किसानों के लिए दोहरी मार है। पहले लागत जुटाने की चिंता और अब तैयार होती फसल बर्बाद होने का दर्द किसानों को परेशान कर रहा है। यद्यपि शासन की ओर से क्षति का आकलन कराया गया है, लेकिन ऐसे किसानों की संख्या बहुत है, जिनके खेतों तक आकलन करने वाली टीम अब तक नहीं पहुंची। ऐसे में नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सामने आने और राहत मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

किसान रामकुमार ने बताया कि धान की फसल गिरने से बालियां पानी में दब गई हैं। दाने सड़ रहे हैं, लागत भी नहीं निकल पाएगी। किसान रामनरेश ने बताया कि खेती में खाद, बीज और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च की थी। फसल बर्बाद होने से लागत निकालना भी मुश्किल है। जरुरी खर्च के लिए बचत संभव ही नहीं है। किसान नेता विनोद शुक्ला बताया कि खेतों में नुकसान साफ दिख रहा है, फिर भी मौके पर जाकर क्षति का आकलन नहीं हो रहा है।

बिना सर्वे सही मुआवजा कैसे मिलेगा? बिना मौका मुआयना रिपोर्ट भेजने से पात्र वंचित रह जाएंगे, अपात्र लाभ उठाएंगे और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। किसान जगदीश ने कहा कि प्राकृतिक आपदा ने पूरे साल की मेहनत पर पानी फेर दिया है। प्रशासन को गांव-गांव जाकर नुकसान का आकलन कर मुआवजा वितरित वितरित करना चाहिए।

राजस्वकर्मी क्षेत्र में जाकर क्षति का आकलन कर रहे हैं। किसी को समस्या है, तो तहसील में संपर्क कर सकते हैं। 33 प्रतिशत से अधिक क्षति होने वाले सभी किसानों को सहायता मिलेगी, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। -रवेंद्र कुमार, एसडीएम, इकौना।

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