उम्र के साथ शारीरिक सुस्ती और वजन बन रही गठिया की वजह, डॉक्टरों से समझिए बचाव के तरीके
गठिया में जोड़ों का दर्द और सूजन उम्र, निष्क्रियता, मोटापा व असंतुलित खानपान से बढ़ता है। विशेषज्ञ समय पर उपचार, वजन नियंत्रण, व्यायाम और संतुलित आहार की सलाह देते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
जोड़ों का दर्द और सूजन गठिया के मुख्य लक्षण हैं।
उम्र, निष्क्रियता, मोटापा गठिया के प्रमुख कारण हैं।
सही उपचार, व्यायाम, संतुलित आहार से गठिया में राहत।
जागरण संवाददाता, श्रावस्ती। बिना थके मीलों चलने वाले कदम जब कुछ सीढ़ियां चढ़ते ही जवाब देने लगें, सुबह उठने पर घुटनों में जकड़न महसूस हो और उंगलियां पकड़ बनाने में परेशानी करने लगें तो इसे उम्र का सामान्य तकाजा मानकर टालना उचित नहीं।
गठिया में जोड़ों का दर्द और सूजन जीवन की सहज रफ्तार पर ब्रेक लगा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ आस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ता है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली की निष्क्रियता, मोटापा और असंतुलित खान-पान भी जोड़ों की परेशानी बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं।
राहत की राह दर्द सहने में नहीं कारण पहचानने और समय पर सही उपचार लेने में है। उम्र बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन दर्द सहते रहना मजबूरी नहीं। सक्रिय जीवनशैली समय पर उपचार से जोड़ों की कार्यक्षमता बचाने की दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत है।
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प्रस्तुत है दैनिक जागरण की विशेषज्ञ चिकित्सकों से बातचीत के अंश-
लगातार दर्द, सूजन या सुबह की जकड़न को नजरंदाज न करें। गठिया के प्रकार की पहचान के लिए चिकित्सकीय जांच कराएं। वजन नियंत्रित करने के लिए नियमित हल्का व्यायाम और निर्धारित दवाएं लेने से राहत मिल सकती है।
-डॉ. विकास सिंह, हड्डी रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कालेज बहराइच।नियमित दिनचर्या, संतुलित और पौष्टिक भोजन तथा शरीर की क्षमता के अनुसार योग अपनाएं। दर्द बढ़ाने वाली गतिविधियों से बचें। सिंकाई, तेलों से हल्की मसाज, सूक्ष्म व्यायाम विशेषज्ञों की सलाह से करें। वजन कम करने से घुटनों पर दबाव घट सकता है।
-डॉ. अनिल त्रिपाठी, आयुष चिकित्सक, सीएचसी इकौना।
दो तरह की होती है गठिया
गठिया दो तरह की होती है। एक 20 से 30 साल की उम्र में होती है। इसमें जोड़ों में सूजन हो जाती है और जोड़ जाम हो जाते हैं। यह समस्या मौसम परिवर्तन के साथ बढ़ती है। इसमें फेफड़े, गुर्दे, और मांस पेशियों में दर्द इसी वजह से होता है। गुर्दे तक खराब हो जाते हैं।
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इसका उपचार बायोलाजिक्स दवाओं से होता है। इम्यूनिटी कम करने वाली दवाएं कारगर साबित हो रही हैं। यह आनुवांशिक बीमारी है। दूसरे तरह का गठिया रोग बढ़ती उम्र में होता है। इसमें कार्टिलेज घिसने से जोड़ों में दर्द होता है और पैरों की चाल कम हो जाती है।
