कमल ककड़ी की खेती से यूपी के किसान जोगिंदर बने लखपति, 32 बीघा खेत से कमा रहे मोटा मुनाफा
शामली के किसान जोगिंदर कश्यप ने 32 बीघा जमीन पर कमल ककड़ी की खेती कर पारंपरिक कृषि से हटकर लाखों रुपये का मुनाफा कमाया है।

कादरगढ़ में स्थित कमल ककड़ी का खेत
HighLights
किसान जोगिंदर कश्यप ने 32 बीघा में की कमल ककड़ी खेती।
पारंपरिक खेती छोड़ लाखों रुपये का मुनाफा कमाया।
फूलों और ककड़ी दोनों से होती है अच्छी कमाई।
अमन सैनी, शामली। परंपरागत खेती से हटकर कुछ नया करने का जज्बा हो तो खेती कमाई का नया रास्ता खोल सकती हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाने की कोशिश गांव कादरगढ़ निवासी किसान जोगिंदर कश्यप कर रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक फसलों के बजाय कमल ककड़ी यानी लोटस फार्मिंग को अपनी खेती का हिस्सा बनाया है।
करीब 32 बीघा क्षेत्रफल में कमल ककड़ी की खेती कर रहे जोगिंदर ने इस नवाचार के लिए देवबंद क्षेत्र के किसानों से प्रेरणा ली। बताया कि वो दो खेत में खेती कर रहे हैं। एक 16 बीघे हसनपुर लुहारी व 16 बीघे कादरगढ़ में है। इस फसल का चक्र करीब पांच महीने का है, जबकि फूल तीन महीने में ही तैयार होकर बिकने लगते हैं। फूलों के साथ कमल ककड़ी की बिक्री से किसान को कमाई के दो अवसर मिलते हैं।
जोगिंदर कश्यप ने बताया कि कमल ककड़ी की खेती करने का विचार उन्हें देवबंद क्षेत्र के किसानों से मिला था। इसके बाद उन्होंने वहां के किसानों से संपर्क किया और खेती के तौर-तरीकों को समझा। शुरुआत के लिए वह सहारनपुर जिले के नानौता क्षेत्र से बीज लेकर आए।

40 से 50 रुपए में मिलता है एक फूल
बीज से अपने खेत में ही बेल तैयार की और फिर तैयार बेल को खेत में लगाया। इस तरह उन्होंने अपनी 32 बीघा जमीन पर कमल ककड़ी की खेती शुरू की। खेती में फूल और ककड़ी दोनों से आमदनी होती है। फसल लगाने के करीब तीन महीने बाद फूल तैयार होने लगते हैं।
सामान्य दिनों में एक फूल की कीमत 40 से 50 रुपये तक मिल जाती है, जबकि दीपावली के दौरान मांग बढ़ने पर एक फूल 60 रुपये तक बिक जाता है। कमल ककड़ी करीब पांच महीने में तैयार होकर निकलनी शुरू होती है। इसकी कीमत सामान्य दिनों में लगभग 80 रुपये प्रति किलोग्राम रहती है, जबकि शादी-विवाह के सीजन में मांग बढ़ने पर यह 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक जाती है।
बताया कि कमल ककड़ी की खेती में एक बीघा पर करीब दो हजार रुपये तक की लागत आती है। पांच महीने की फसल अवधि में एक बीघा से करीब 40 हजार रुपये तक की आमदनी होती है। फूलों की बिक्री शुरू होने से फसल तैयार होने से पहले भी कमाई का रास्ता खुल जाता है।
