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यूपी चुनाव से पहले शामली में सियासी पारा हाई, टिकट की जंग और दल-बदल से गरमाई राजनीति

Published: Tue, 20 Oct 2026 11:02 AM (IST)

शामली जिले में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जहां विभिन्न दलों में टिकट के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा और दल-बदल का दौर जारी है।

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HighLights

  1. शामली में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज।

  2. विभिन्न दलों में टिकट के लिए दावेदारों की लंबी फेहरिस्त।

  3. बसपा की खामोशी ने बढ़ाई राजनीतिक विश्लेषकों की चिंता।

अनुज सैनी, शामली। विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही पश्चिमी यूपी की राजनीति में अहम शामली जिले में सियासी पारा चढ़ गया है। सियासी दलों के बीच लगातार हो रहे दल बदल और टिकट की जंग ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

एक तरफ जहां भाजपा, सपा और रालोद में मजबूत चेहरों को अपने पाले में लाने और टिकट की होड़ मची है, वहीं दूसरी ओर बसपा की चुप्पी ने तमाम राजनीतिक विश्लेषकों को पसोपेश में डाल दिया है।

जिले की तीनों प्रमुख सीटों थानाभवन, शामली और कैराना पर टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त ने पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व की नींद उड़ा दी है।

थानाभवन सीट पर भाजपा और रालोद के बीच खींचतान है। भाजपा से पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा क्षेत्र में लगातार पसीना बहा रहे हैं, तो वहीं पूर्व चेयरमैन संजय शर्मा भी सक्रियता के साथ टिकट के लिए ताल ठोक रहे हैं।

दूसरी ओर, गठबंधन सहयोगी रालोद से विधायक अशरफ अली खान दोबारा मैदान में उतरने के लिए प्रबल दावेदार हैं, लेकिन पूर्व विधायक राव अब्दुल वारिस की अंदरूनी दावेदारी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। रालोद हिंदू प्रत्याशी उतारेगा या मुस्लिम चेहरा बनाए रखेगा, इस पर भी मंथन जारी है।

शामली सीट पर भी समीकरण तेजी से बदले हैं। सपा में करीब एक साल पहले शामिल हुए पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल, उनके बेटे अखिल बंसल व वरिष्ठ सपा नेत्री पूर्व चेयरमैन दीपा पंवार मजबूत दावेदारी जता रहे थे, लेकिन हाल ही में भाजपा छोड़कर आए हरबीर मलिक की एंट्री से यहां कांटे की टक्कर तय मानी जा रही है। गठवाला खाप की मलिक बिरादरी की सीट पर खासी आबादी है। वहीं, रालोद से विधायक प्रसन्न चौधरी भी फिर से मैदान में उतरने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

उधर, कैराना सीट पर सपा से विधायक नाहिद हसन का पलड़ा भारी है, क्योंकि यहां से सपा से कोई अन्य मजबूत दावेदारी नहीं है। भाजपा खेमे में भाजपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह के पुत्र मनीष चौहान, मृगांका सिंह और अनिल चौहान के बीच टिकट पाने के लिए रस्साकसी चल रही है।

वहीं बसपा खेमे में छाई खामोशी ने सबको हैरान कर रखा है। बसपा से अभी तक कोई बड़ा चेहरा सामने नहीं आया है। जानकारों का मानना है कि बसपा ऐन वक्त पर समीकरण बिगाड़ सकती है।

थानाभवन विधानसभा सीट पर उलझा समीकरण

थानाभवन पर सपा से राहुल सैनी, पूर्व जिपं सदस्य एवं हाल ही रालोद छोड़कर आए पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश सैनी, ठा. शेर सिंह राणा, वतन सैनी की दावेदारी भी है। आसपा से राव मौसम घोषित हो चुके हैं, वहीं हाल ही में आसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व सांसद अमीर आलम व उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान भी कांग्रेस से ताल ठोक रहे हैं।

सियासी पंडितों का कहना है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन के चलते थानाभवन सीट पर कांग्रेस भी चुनाव लड सकती है, ऐसे में प्रत्याशी कौन रहेगा, इस पर असमंजस है। कुल मिलाकर थानाभवन सीट पर सर्वाधिक मारामारी से समीकरण उलझे है।

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