शामली, जागरण टीम। कोविड अस्पताल में 14 वेंटीलेटर हैं, लेकिन एक भी नहीं चल सका, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के पास तकनीशियन ही नहीं है। संविदा पर नियुक्ति के प्रयास चल रहे हैं पर अभी तक कोई अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए नहीं पहुंचा है। ऐसे में वेंटीलेटर जल्द चलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

कोरोना की शुरुआत में झिझाना सीएचसी में कोविड लेवल-1 अस्पताल बनाया गया था। किसी मरीज की तबीयत जरा भी खराब होती थी तो मेडिकल कालेज मेरठ रेफर कर दिया जाता था। सितंबर के अंत में जिला संयुक्त अस्पताल में कोविड लेवल-2 चिकित्सालय शुरू हुआ। वेंटीलेटर की सुविधा भी थी। खैर, सितंबर से ही केस कम होना शुरू हो गए थे और वेंटीलेटर की बहुत अधिक आवश्यकता भी नहीं पड़ी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गई। कोरोना की दूसरी लहर ने हालात पूरी तरह बिगाड़े हुए हैं, लेकिन वेंटीलेटर होने के बाद भी मरीजों को उनका लाभ नहीं मिल रहा। अधिक गंभीर हालत वाले मरीजों को मेडिकल कालेज सहारनपुर रेफर कर दिया जाता है। गंगामृत अस्पताल से तकनीशियन बुलाए गए थे, लेकिन 24 घंटे के लिए वह उपलब्ध नहीं हो सकते थे।गत दिनों छह वेंटीलेटर तकनीशियन को संविदा पर रखने की प्रक्रिया शुरू की गई। नियुक्ति छह माह के लिए ही होगी। सरकार के निर्देश पर अवधि बढ़ भी सकती है। साक्षात्कार के लिए तीन से आठ मई तक अभ्यर्थियों को आमंत्रित किया है, लेकिन अभी तक कोई नहीं आया है। सीएमओ डा. संजय अग्रवाल का कहना है कि वेंटीलेटर के लिए अनुभवी तकनीशियन की जरूरत होती है। जैसे ही तकनीशियनों का प्रबंध होगा, वैसे ही उक्त सुविधा का लाभ मरीजों को मिलने लगेगा। नियुक्ति के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही उपलब्ध संसाधनों से मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा रहा है।

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