शामली, जागरण टीम। संस्कृत शिक्षा का कोर्स सरल किया जाएगा। संविदा पर शिक्षकों की तैनाती की जा रही है। संस्कृत विद्यालयों को मान्यता प्रदान करने के लिए नियम सरल किए जा रहे हैं। यही नहीं संस्कृत की पढ़ाई को रोजगार से जोड़ा जाएगा। यह बात उत्तर प्रदेश संस्कृत शिक्षा परिषद की मान्यता समिति के सभापति एवं एमएलसी श्रीचंद शर्मा ने कही।

गुरुवार शाम कमला कालोनी स्थित समाजसेवी प्रतीक गर्ग के आवास पर दैनिक जागरण से बातचीत में एमएलसी श्रीचंद शर्मा ने कहा कि परिषद का लखनऊ में अलग से मुख्यालय बनाया जा रहा है। इस पर करीब नौ करोड़ रुपये खर्च होंगे। जो स्कूल शिक्षकों की कमी की वजह से बंद हो गए थे, उन्हें संविदा पर शिक्षक नियुक्त करके दोबारा से शुरू कराया जा रहा है। संविदा पर करीब चार हजार शिक्षकों की तैनाती करने का लक्ष्य है। छात्र-छात्राओं को संस्कृत के प्रति आकर्षित करने के लिए कोर्स का सरलीकरण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा को रोजगार से जोड़ने के लिए पुरोहित और योग शिक्षा के डिप्लोमा दिए जाएंगे ताकि युवा रोजगार से जुड़ सकें। इस दौरान उनके साथ जिलाध्यक्ष सतेंद्र तोमर भी मौजूद थे। सरकारी स्कूलों में नियुक्ति की मांग

उन्होंने कहा कि हमने सरकार से मांग रखी है कि सरकार के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी संस्कृत शिक्षकों की तैनाती की जाए। सरकार ने इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है। यदि सरकार उनकी यह मांग मान लेती है तो संस्कृत से शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने कहा कि देवभाषा के उत्थान के लिए युवाओं को भी पहल करनी होगी। सरकार अपने स्तर से प्रयास कर रही है। निजी क्षेत्र के उच्च शिक्षा के शिक्षकों को भी मिलेगा तोहफा

उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के उच्च शिक्षा में जो भी शिक्षण कार्य में लगे हुए हैं, उन्हें भी सरकार की ओर से जल्द तोहफा मिलेगा। उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

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