जासं, शामली: कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में दो बेटों की शहादत से पूरे जिले में गम और गुस्सा है। सीआरपीएफ में तैनात बनत निवासी प्रदीप कुमार व रेलपार कॉलोनी निवासी अमित कुमार की शहादत के बाद पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोशित लोगों ने पीएम नरेंद्र मोदी से खून के बदले खून की मांग की है। डीएम अखिलेश ¨सह व एसपी अजय कुमार पांडेय समेत विभिन्न जनप्रतिनिधियों में शहीद जवानों के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी। घरों में चूल्हे नहीं जले। हजारों लोग शहीद बेटों के पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे हैं।

पुलवामा विस्फोट में शहीद हुए प्रदीप कुमार प्रजापति (37) पुत्र जगदीश ¨सह सीआरपीएफ की 21 वीं बटालियन में कांस्टेबल जबकि अमित कुमार (23) 92वीं बटालियन में तैनात थे। गुरुवार रात नौ बजे सीआरपीएफ के टूआइसी एसएस यादव ने प्रदीप के पिता जगदीश ¨सह व रात एक बजे अमित के भाई अर्जुन को उनकी शहादत की सूचना फोन पर दी थी। प्रदीप की पत्‍‌नी शर्मिष्ठा व दो बच्चे गो¨वदपुरम (गाजियाबाद) में रहते हैं। अमित कुमार अविवाहित थे। उनका परिवार रेलपार कॉलोनी में रहता है। शहीद जवानों के घर पर सांत्वना देने हजारों लोग पहुंचे। शुक्रवार सुबह डीएम, एसपी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता व संगठन के नेता व लोगों ने शहीदों के घर पहुंचकर परिजनों को ढाढस बंधाया। पाक के खिलाफ फूट रहा आक्रोश

पूरे जिले में विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक व ¨हदूवादी संगठनों ने पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान पाकिस्तान का झंडा जलाया और पीएम नरेन्द्र मोदी से पाकिस्तान पर हमला करने व खून का बदला खून से लेने की मांग की गई। शोक सभाओं में दोनों शहीदों को श्रद्धाजंलि दी गई। कैंडल मार्च भी निकाला। 'जब तक सूरज चांद रहेगा, प्रदीप-अमित तेरा नाम रहेगा' के गगनभेदी नारों से चारों दिशाएं गूंज उठीं। महिला संगठनों ने भी पुतले फुंके।

Posted By: Jagran

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