संवाद सहयोगी, कलान/शाहजहांपुर :

गंगा से करीब छह किमी. दूरी पर है गांव कासिमनगला। नमामि गंगे योजना के तहत चयनित हेतमपुरा ग्राम पंचायत का मजरा है। यहां रहने वालीं 60 वर्षीय रामसुखी के घर शौचालय नहीं है। जब से शादी होकर आईं खेत पर ही जाती रहीं। उनके तीन बेटों में से दो की शादी भी हो चुकी है। दोनों बेटों के बहुओं को भी खुले में जाना पड़ता है। रामसुखी बताती हैं कि कई बार प्रधान व सेक्रेटरी से शौचालय बनवाने के लिए कहा, लेकिन हर बार जवाब मिलता है कि अगली सूची में नाम आएगा तब बनेगा। इसी ग्राम पंचायत के दिनेश की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। आठ दिन पहले शादी हुई है। शौचालय के लिए काफी समय से प्रयासरत हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। परिवार वाले तो किसी तरह एडजस्ट कर रहे थे, लेकिन नई बहू को दिक्कत से वे परेशान हैं। यह व्यथा रामसुखी या दिनेश की नहीं है, बल्कि नमामि गंगे योजना के तहत चयनित छह ग्राम पंचायतों व उनके मजरों में रहने वाले 698 परिवारों की है। प्रशासन की लापरवाही व जिम्मेदारों की मनमानी के कारण ओडीएफ हो चुकी इन ग्राम पंचायतों में लोग अब भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। यह स्थिति तब 30 जनवरी तक इन ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण का काम पूरा कराकर इन्हें ओडीएफ प्लस घोषित किया जाना था। इसके लिए ग्राम पंचायतों के खातों में बजट भी जारी कर दिया गया, लेकिन उसका प्रयोग दूसरे कार्यों में हो गया।

लोग किए जागरूक, खुद नहीं हुए

अभी कुछ दिन पहले की बात है। नमामि गंगे यात्रा निकाली गई। प्रदेश सरकार के मंत्रियों अलावा जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। लाखों रुपये का बजट खर्च हुआ मकसद था लोगों को जागरूक करने का। ताकि गंगा को स्वच्छ बनाया जा सके, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। यात्रा निकालने से ग्रामीण तो जागरूक हो गए, लेकिन अधिकारियों ने अब तक अधिकारियों ने खुद कोई ध्यान नहीं दिया। जिस कारण गंगा साफ होने की बजाय मैली हो रही है।

खुलासे पर मची खलबली

कलान व मिर्जापुर ब्लाक की जहानाबाद खमरिया, मोहनपुर कलुआपुर, एत्मादपुर चक, हेतमपुर, पैलानी उत्तर व दोषपुर थोक ग्राम पंचायतें नमामि गंगे योजना में शामिल है। इन ग्राम पंचायतों में अब तक 2956 शौचालय बन चुके हैं। जब नो वन लेफ्ट बिहाइंड (एनओएलबी) सर्वे कराया तो 698 ऐसे परिवार मिले जो खुले में शौच जा रहे थे। शासन को रिपोर्ट भेजी गई तो वहां से बजट भेज दिया गया। अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों के खातों में भेजकर इतिश्री कर ली। उसके बाद शौचालय बने या नहीं बने यह देखने की फुर्सत किसी को नहीं मिली। दैनिक जागरण ने जब शौचालय का रुपया निजी काम में खर्च होने का खुलासा किया तो आनन फानन में शौचालय बनवाने के निर्देश जारी कर दिए गए।

भरी है लकड़ी व उपले

हेतमपुर ग्राम पंचायत में कई शौचालय टूटे पड़े हैं। गांव के अंदर कई शौचालय काफी पुराने हैं। उनमें उपले एवं लकड़ी भर दी गई है।

फोटो 26 एसएचएन : 26

हम तो मजबूरी में खुले में शौच जाते रहे, लेकिन अब बहुओं को भी शर्मसार होना पड़ता है। शौचालय बनवाने पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।

रामसुखी, कासिमनगला

फोटो 26 एसएचएन : 27

कुछ दिन पहले शादी हुई है। सोचा था कि शौचालय मिल जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

दिनेश, कासिमनगला

फोटो 26 एसएचएन : 28

शौचालय के लाभार्थियों की सूची में मेरा नाम शामिल है, लेकिन अब तक शौचालय नहीं बना। प्रधान से सही जवाब नहीं मिल रहा है।

राजबेटी, कासिमनगला

फोटो 26 एसएचएन : 29

जो शौचालय बना था वह टूट गया। इसलिए खेत में जाना पड़ रहा है। परिवार के लोगों को भी परेशानी हो रही है।

श्रीदेवी, कासिमनगला

फोटो 26 एसएचएन : 30

मेरे बेटे जवाहर के नाम पर शौचालय स्वीकृत हुआ था, जिसके निर्माण के लिए कल ही ईंट आई हैं। निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ।

मीरा देवी, हेतमपुर

फोटो 26 एसएचएन : 31

हमें अब तक शौचालय नहीं मिला है। सेक्रेटरी हों या प्रधान कोई सही जवाब नहीं देता। परिवार को मजबूरन खेत पर शौच के लिए जाना होता है।

हरिराम, हेतमपुर शौचालय के लिए निर्माण सामग्री नहीं मिली। इस कारण निर्माण नहीं हो सका। जल्द ही शौचालय निर्माण करवा दिया जाएगा।

पुष्पा देवी, ग्राम प्रधान हेतमपुर

परियोजना निदेशक ने आज ही बैठक ली है। हेतमपुर में 194 में 30 अपात्रों के नाम सूची में आ गए थे, लेकिन उनके नाम का भी रुपया निकाल लिया गया है, जिसकी रिकवरी होगी। प्रधान व सेक्रेटरी के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीपीआरओ को पत्र लिखा जा रहा है।

रामशंकर, बीडीओ, कलान -----------------------

जिला विकास अधिकारी जांच कर रहे हैं। तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है, दो दिन हो गए हैं। शौचालयों का निर्माण पूरा कराया जाएगा। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

महेंद्र सिंह तंवर, सीडीओ

Posted By: Jagran

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