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जेवर गिरवी रखकर बोया था धान, बारिश ने सब उजाड़ा... अब खेत का किराया कहां से देंगे किसान?

Published: Mon, 28 Sep 2026 06:38 PM (IST)

शाहजहांपुर में बारिश और आंधी ने किसानों की धान व गन्ने की फसल बर्बाद कर दी है, जिससे लागत निकालना ...और पढ़ें

बरसात के पानी में डूबी धान की फसल। जागरण

बरसात के पानी में डूबी धान की फसल। जागरण

HighLights

  1. बरसात के कारण खेतों में गिरी फसल देखकर किसान परेशान, लागत भी निकलना मुश्किल

जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। घुसगवां गांव के किसान राजीव ने आठ बीघा खेत में धान की फसल लगाई थी। हाल ही में आई आंधी और बरसात ने दो बीघा फसल को गिरा दिया। इसके बाद हुई बारिश ने तीन बीघा धान को बर्बाद कर दिया। राजीव ने कहा कि अब उपज आधी से भी कम होगी, जिससे लागत भी नहीं निकल पाएगी। उन्हें ट्रैक्टर के लोन की किस्त चुकानी है और बीज, खाद व दवा के लिए लिया गया उधार भी चुकाना है।

कटैया गांव के लड्डन की पूरी फसल भी खराब हो गई है। उन्होंने बताया कि पत्नी आसमा के जेवर गिरवीं रखकर 37 बीघा खेत ठेके पर लिया था। फसल अच्छी थी और कटाई की तैयारी थी, लेकिन अचानक आई बरसात ने सबकुछ बर्बाद कर दिया।

लड्डन ने कहा कि उन्हें नौ हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से खेत का किराया देना है। अब जेवर छुड़ाना तो दूर, ब्याज चुकाना भी मुश्किल हो रहा है। जिले में कई किसानों की धान और गन्ने की फसल को नुकसान हुआ है।

इनमें से कई ने खाद और बीज उधार लेकर खरीदे थे, लेकिन अब पानी में गिरी फसल से लागत भी निकलना मुश्किल है। घुसगवां गांव के प्रेमपाल, मुनेश, सुखपाल सिंह, अजीत और मुकेश जैसे कई किसान हैं जिन्होंने ठेके या बटाई पर खेत लिया था।

मगर, बरसात ने उनकी फसल को बर्बाद कर दिया। कृषि विभाग ने सर्वे शुरू किया है, लेकिन नुकसान का सटीक आंकड़ा अभी नहीं आया है। किसान 70 प्रतिशत नुकसान की बात कर रहे हैं, जबकि उप कृषि निदेशक पीके मिश्रा का मानना है कि क्षति 30 प्रतिशत तक हुई है।

सर्वे के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जिले में इस बार दो लाख 18 हजार 760 हेक्टेयर में धान की फसल हुई है। जहां धान में बालियां आ गई हैं और पौधा भारी हो गया है, वहां गिरने की आशंका अधिक है।

तिल और उर्द की फसल में नुकसान फसल की अवस्था पर निर्भर करेगा। सरसों की फसल को 30 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका है। गन्ने की फसल भी प्रभावित हुई है।

जिला गन्नाधिकारी अनिल कुमार भारती ने बताया कि लगातार बरसात के कारण कई किसानों के खेतों में गन्ना गिर गया है। बरसात रुकने के बाद पूरे क्षेत्र में सर्वे कराया जाएगा, जिससे गिरे गन्ने का क्षेत्रफल और नुकसान की स्थिति का पता चल सके।

गन्ना गिरने से उसकी पत्तियां एक-दूसरे के ऊपर आ जाती हैं, जिससे धूप नहीं मिल पाती और प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है। इससे गन्ने की बढ़वार, मोटाई और रिकवरी पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में 30 प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

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