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UP में मुफ्त राशन और सरकारी चावल की सप्लाई पर संकट! राइस मिलरों ने हड़ताल कर धान कुटाई से किया इनकार

Published: Sat, 17 Oct 2026 09:12 PM (IST)

उत्तर प्रदेश में राइस मिलरों ने धान कुटाई से इनकार कर दिया है, क्योंकि सरकार ने प्रोत्साहन राशि पूरी तरह ...और पढ़ें

रोजा मंडी में धान की होती तौल। जागरण

रोजा मंडी में धान की होती तौल। जागरण

HighLights

  1. 42 लाख मीट्रिक टन चावल तैयार करके देना है इस बार

जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। धान की भरपूर पैदावार वाले प्रदेश में इस बार चावल पर रार छिड़ गई है। जिस प्रोत्साहन राशि को राइस मिलर गत एक माह से बढ़ाने की मांग कर रहे थे, सरकार ने उसे पूरी तरह से समाप्त कर दिया। नाराज राइस मिलरों ने इस संबंध मेंं मुख्यमंत्री से संपर्क साधा है।

जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के माध्यम से भी अपनी बात शासन तक पहुंचाने की काेशिश की। सकारात्मक परिणाम न मिलते देख राइस मिलरों ने धान कुटाई से इन्कार कर दिया है।

सरकारी खरीद के बाद धान राइस मिलरों के पास कुटाई के लिए भेजा जाता है। इसके बाद जो चावल तैयार होता है उसे एफसीआई उठान कराकर आपने गाेदामों में भेजता है।

बाद में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशनकार्ड धारकों, मिड डे मील के वितरण के साथ ही आपात सरकारी स्टाक के लिए रखा जाता है। प्रदेश की करीब पांच हजार राइस मिल हैं, जिनमें 1,810 धान की कुटाई करती हैं।

जिसका इनको भुगतान किया जाता है। इसके साथ ही सरकार राइस मिलरों को प्रोत्साहन राशि भी देती थी। इसके तहत तय समय पर चावल तैयार करके देने पर दस रुपये प्रति क्विंटल दिया जाता था। समय-समय पर इसमें वृद्धि हुई।

वर्ष 2021-22 में 15 दिन में तैयार चावल मिलने पर 35 रुपये और 25 दिन में पर 30 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दी जाने लगी। गत वर्ष से प्रदेश के राइस मिलर सरकार से इसे बढ़ाकर 50 रुपये किए जाने की मांग कर रहे थे।

मगर, सरकार ने इस वर्ष तैयार अपनी नई नीति में इसे पूरी तरह से समाप्त कर दिया। हालांकि चावल उठान के लिए समयसीमा 30 जून कर दी है, लेकिन राइस मिलर प्रोत्साहन राशि न मिलने से नाराज हैं।

उनका कहना है कि बकाया भुगतान सहित कई मुद्दे पहले ही अनिस्तारित हैं। अब इस नई व्यवस्था में उन लोगों की बात सुनने की बजाय प्रोत्साहन राशि ही बंद कर दी। ऐसे में वे लोग भी धान की कुटाई नहीं करेंगे।

ऐसे में कोई अन्य विकल्प न होने से सरकारी चावल का स्टाक नहीं हो सकेगा। जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर सीधा असर पड़ेगा। गत वर्ष प्रदेश में करीब 67 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी।

इससे लगभग 45 लाख मीट्रिक टन चावल मिला था। इस वर्ष सरकार ने 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। इससे करीब 42 लाख मीट्रिक टन चावल मिलने का अनुमान है।

बकाया है राइस मिलरों का करोड़ों का भुगतान

उप्र राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री हरिकिशोर गुप्ता ने बताया कि सरकार ने आनलाइन पोर्टल पर सुझाव मांगे गए थे, जिनमें हम लोगों ने प्रोत्साहन राशि 15 रुपये बढ़ाने के साथ ही कई अन्य मांगें रखी थीं, लेकिन सरकार ने प्रोत्साहन राशि पूरी तरह समाप्त कर दी।

पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसफ पर प्रदेश के राइस मिलरों का करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया है, जो कई बार शासन स्तर पर ज्ञापन व बैठकों के बाद अब तक नहीं मिल सका।

हम पूरब की तरह पूरे प्रदेश में पहली नवंबर से सरकारी खरीद शुरू करने की मांग कर रहे थे ताकि एक समानता रहे, पर पश्चिम में खरीद इस बार भी 12 अक्टूबर से 15 फरवरी तक कर दी गई।

राइस मिलर को खरीद एजेंसी बनाने की मांग पर भी ध्यान नहीं दिया, इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होती। इसलिए प्रदेश के सभी राइस मिलर ने तय किया है कि धान की कुटाई नहीं करेंगे।

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