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UP में धान की बंपर आवक, फिर भी पंजाब से चावल मंगाने की नौबत क्यों? 65 लाख टन के लक्ष्य से नाराज मिलर्स ने खोली पोल

Published: Thu, 22 Oct 2026 06:00 AM (IST)

उत्तर प्रदेश में धान खरीद का लक्ष्य कम होने के कारण राइस मिलर्स पर्याप्त चावल तैयार नहीं कर पा रहे ...और पढ़ें

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HighLights

  1. मुख्यमंत्री तक पहुंचाए मांगे पत्र, अब तक नहीं मिला सकारात्मक उत्तर

अंबुज मिश्र, शाहजहांपुर। धान खरीद शुरू हुए सप्ताह भर बीत चुका है, लेकिन 99 प्रतिशत केंद्रों पर अभी खाता तक नहीं खुला है। मंडियों में बंपर आवक है, जिस कारण धान हरियाणा, पंजाब भी भेजा जा रहा है। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी इन्हीं राज्यों से सरकार को चावल मांगना पड़ेगा, क्योंकि सरकारी खरीद का जो लक्ष्य तय किया गया है, वह आवश्यकता से कम है।

प्रदेश के राइस मिलर लगातार इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। ताकि पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता न रहे, लेकिन सरकार की ओर से सकारात्मक रुख नहीं मिल रहा।

सरकार प्रतिवर्ष किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदती है। उसके बाद राइस मिलों से कुटाई कराकर तैयार चावल का भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में स्टाक किया जाता है।

जहां से चावल को सार्वजनिक वितरण प्रणाली, मिड डे मिल वितरण आदि के लिए भेजा जाता है, लेकिन सरकारी खरीद का कोटा आवश्यकता से कम होने के कारण चावल का स्टाक कम पड़ जाता है।

धान से चावल तक_ मिलिंग का सफर

इसकी पूर्ति करने के लिए सरकार को पंजाब से प्रतिवर्ष अतिरिक्त चावल खरीदना पड़ता है। उत्तर प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री हरिकिशोर गुप्ता बताते हैं कि सरकारी लक्ष्य प्रदेश में चावल की आवश्यकता को देखते हुए कम है।

इस वर्ष 65 लाख टन धान की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा है, जबकि राइस मिलर्स एसोसिएशन ने 110 लाख टन सरकारी खरीद की मांग की है। क्योंकि सरकार चावल की प्रति क्विंटल 67 प्रतिशत रिकवरी लेती है।

ऐसे में खरीद का लक्ष्य बढ़ाया जाए तो राइस मिलर पर्याप्त चावल तैयार करके देंगे। जिससे पंजाब व हरियाणा पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। इससे राइस मिल उद्योग को भी लाभ होगा। सरकार के अतिरिक्त व्यय में कमी आएगी।

राजस्व में भी वृद्धि होगी, क्योंकि दूसरे राज्य से चावल मंगवाने के लिए किराया खर्च करना होता है। इसके अतिरिक्त चावल की लोडिंग, अनलोडिंग व परिवहन के दौरान प्रति क्विंटल .25 प्रतिशत ट्रांजिट लास भी होता है, जो कहीं न कहीं आर्थिक नुकसान कराता है।

प्रदेश महामंत्री ने बताया कि इस बार भी राइस मिलर्स एसोसिएशन ने शासन स्तर पर कई मांग पत्र दिए हैं। मुख्यमंत्री से भी लक्ष्य बढ़ाने की मांग की है, लेकिन अभी कोई आश्वासन नहीं मिला है।

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