शाहजहांपुर: 19 करोड़ की लागत से बना चमचमाता बस अड्डा 6 महीने में ही जर्जर, खुली घटिया निर्माण की पोल
शाहजहांपुर में 19 करोड़ की लागत से छह माह पहले बने रोडवेज बस अड्डे की हालत जर्जर हो गई है, ...और पढ़ें

रोडवेज बस अड्डा में रखी टूटी बेंचे। जागरण
HighLights
अप्रैल में हुआ था बस अडडा व कार्यशाला में कराए गए कार्यों का लोकार्पण, सामने आई काम में लापरवाही
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। छह माह पूर्व 19 करोड़ की लागत से जीर्णाेद्वार के बाद तैयार हुए रोडवेज बस अड्डे की खामियां सामने आने लगी हैं। स्टील की बेंचे टूटने लगी हैं। फर्श उखड़ने लगा है। सीलिंग में लगी लाइटें भी लटक गईं हैं। इन अव्यवस्थाओं के कारण यात्रियों को परेशानी हो रही है, लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
परिवहन निगम ने जल निगम की निर्माण एजेंसी सीएंडडीएस से बस अड्डा का पुनरोद्धार कार्य कराया था, जिस पर 19 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। जबकि इसकी कार्यशाला के निर्माण पर 11 करोड़ रुपये व्यय किए गए।
20 अप्रैल को इसका शिलान्यास किया गया, लेकिन छह माह में ही यहां पर कराए गए कार्याें की कलई खुलकर सामने आ गई। स्टील की बेंचे टूटने लगी है। पंखों के पर मुड़ गए गए हैं।

बस अड्डा के बाहर सड़क को खोदकर ह्यूम पाइप लाइन डालने का काम चल रहा है। इसको ध्यान में रखकर बसों को सेटेलाइट बस अड्डा से किया जा रहा है। इसलिए यहां पर शनिवार को यात्रियों की आवाजाही नहीं थी।
परिसर में फर्श की बजरी जगह-जगह उखड़ रही है। यहां बरामदे में यात्रियों के लिए जो बेंचे डालीं गईं वे भी टूटी हुईं हैं। बरामदे में ही सीलिंग में लगी लाइटें खराब होने के कारण निकाल कर अलग रख दी गईं हैं।
एआरएम कार्यालय कक्ष के पास स्थित शौचालय परिसर में कुछ टूटी बेंचे रख दी गईं हैं। जबकि डिपो प्रभारी मृदुल कुमार सिंह के कक्ष में एक पंखा ही गायब मिला।

दूसरी मंजिल पर बनाए गए व्यावसायिक हाल में आंधी के दौरान शीशे ढीले हो गए थे, जिन्हे रोकने के लिए लोहे की कीलों की मदद से इन्हें राेका गया है। अग्निशमन यंत्र का पाइप सुतली से बंधा मिला।
मुख्य द्वार के फाटक को रोकने वाली लोहे की राड गायब थी, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकता है। रोडवेज की कार्यशाला का हाल भी खराब है। यहां फर्श की बजरी उखड़ी से बजरी दिखाई देने लगी है।
सीवर के मेनहोल का ढक्कन टूटने की वजह से गड्ढा हो गया है। जिस कारण यहां काम करने वाले कर्मचारियों को चोट लगने की आशंका बनी रहती है।

कुछ कर्मचारियो ने बताया कि बरसात के दौरान लिंटर से पानी रिसकर दीवार के सहारे आ जाता है। एआरएम अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि सीएंडडीएस से निर्माण कार्यों में खामियों पर जवाब मांगा है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
