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शाहजहांपुर में कपड़े धोने वाले डिर्जेन्ट और रिफाइंड से बनाया जा रहा था नकली दूध, एक आरोपी गिरफ्तार

Published: Thu, 27 Aug 2026 07:59 PM (GMT+05:30)

शाहजहांपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक दूध कलेक्शन सेंटर पर छापा मारकर मिलावटी दूध बनाने वाले मुन्नालाल को गिरफ्तार किया।

गढिया रंगीन में नकली दूध बनाने का पकडा कैमिकल की जांच करते खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम

गढिया रंगीन में नकली दूध बनाने का पकडा कैमिकल की जांच करते खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम

HighLights

  1. मुन्नालाल डिटर्जेंट मिलाकर नकली दूध बनाता था।

  2. खाद्य सुरक्षा विभाग ने शाहजहांपुर में छापा मारा।

  3. मिलावटी दूध से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। अच्छी सेहत के लिए दूध पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन यही दूध जानलेवा भी हो सकता है। दूध कलेक्शन सेंटर संचालक मुन्नालाल ने अधिक मुनाफा कमाने के लालच में लोगों का जीवन खतरे में डाल दिया।

खराब गुणवत्ता वाले दूध पाउडर में रिफाइंड व कपड़े धोने वाला लिक्विड डिर्जेन्ट मिलाकर फतेहगंज पूर्वी स्थित सृजनी मिल्क प्रोडयूसर कंपनी पर बेचने लगा। गुरुवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने छापा मारा तो नकली दूध का खेल खुला। आरोपित को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है। बरेली में भी विभागीय अधिकारियों से कंपनी पर स्टाक की जांच के लिए संपर्क किया गया है।

गढ़िया रंगीन के कन्हानी नगला देहात माली गांव में सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा विनीत कुमार के नेतृत्व में जब टीम मुन्नालाल के दूध संकलन केंद्र पर पहुंची तो मौके पर 30 लीटर दूध का स्टॉक मिला। पास में ही मावा भी तैयार किया जा रहा था।

सहायक खाद्य आयुक्त ने बताया कि मुन्नालाल विक्रेताओं से दूध एकत्र करके फतेहगंज पूर्वी में सृजनी कंपनी को बेचता था। कुछ वर्षों से उसने नकली दूध तैयार करना शुरू किया। प्रतिदिन वह 50 से 60 लीटर दूध् तैयार करता था। इसमें वह कुछ लोगों से सही दूध खरीदकर मिला देता था। उसके बाद कंपनी को आपूर्ति कर देता था।

उन्होंने बताया कि नकली दूध तैयार करने में 20 से 22 रुपये प्रति लीटर खर्च आता था, जबकि मुन्नालाल को कंपनी से 50 से 55 रुपये भुगतान होता था। उन्होंने बताया कि दूध, मावा, सोयाबीन रिफाइंड, डिर्जेन्ट के साथ ही मौके पर मिले केमिकल का भी सैंपल लिया गया है।

केमिकल की पुष्टि जांच में होगी, लेकिन प्रारंभिक तौर पर यह सिलाई मशीन में प्रयोग किए जाने वाला तेल लग रहा है, जिसे दूध में अधिक चिकनई के लिए प्रयोग किया जाता होगा। हालांकि दूध के नमूने की जांच में स्थिति स्पष्ट हाेगी।

उन्होंने बताया कि प्राथमिकी के लिए तहरीर दी है। इस तरह के प्रकरण में सात या इससे अधिक वर्ष की सजा वाली धाराओं में प्राथमिकी दर्ज होगी। सैंपल की जांच रिपोर्ट के आधार पर वाद दायर किया जाएगा। टीम में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुभाष तिवारी, विनय कुमार यादव, सौरभ सोनी आदि शामिल रहे।

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इस तरह तैयार होता था दूध

पानी में खराब गुणवत्ता वाला दूध पाउडर मिलाने के बाद चिकनई के लिए उसमें रिफाइंड सोयाबीन ऑयल मिलाया जाता था। रिफाइंड पानी में घुलनशील नहीं होता है। इसलिए डिर्जेन्ट का प्रयोग किया जाता था।

इस तरह के मिलावटी व डिर्जेन्ट युक्त दूध को पीने से सीधे लीवर पर असर होता है। जिससे लोगों की पाचन क्रिया प्रभावित होती है। उनके भूख कम लगना और वजन गिरने जैसी दिक्कत हो सकती है। लंबे समय तक इसका प्रयोग गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

                                           डॉ. मोहम्मद सलीम, वरिष्ठ फिजिशियन राजकीय मेडिकल कॉलेज