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हादसों में शाहजहांपुर यूपी में नंबर-1, फिर भी बेपरवाह अफसर: हाईवे बना पार्किंग, अनदेखी से कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा!

Published: Wed, 07 Oct 2026 07:55 PM (IST)

शाहजहांपुर हादसों में प्रदेश में पहले स्थान पर है, फिर भी लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर भारी वाहन बेतरतीब खड़े रहते हैं, जिससे बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है।

लखनऊ दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर महाराणा प्रताप पार्क के पास सड़क के किनारे खडे वाहन। जागरण

लखनऊ दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर महाराणा प्रताप पार्क के पास सड़क के किनारे खडे वाहन। जागरण

HighLights

  1. लखनऊ दिल्ली हाईवे पर कई-कई दिन खड़े रहते हैं भारी वाहन

  2. डीएम के निर्देश के बाद भी कार्रवाई को तैयार नहीं परिवहन विभाग

जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर/रोजा। हादसों में होने वाली मौतों के मामले में जनपद प्रदेश में पहले स्थान पर पहुंच गया। शासन तक किरकिरी हुई। मंडलायुक्त ने भी नाराजगी जतायी, लेकिन परिवहन विभाग व यातायात पुलिस पर रत्ती भर फर्क नहीं पड़ा।

एक्सीडेंट जोन बन चुका लखनऊ दिल्ली हाईवे राष्ट्रीय राजमार्ग हो या फिर अन्य प्रमुख मार्ग, सड़क पर बेतरतबीत तरीके से खड़े होने वाले भारी वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

निवाजपुर में तो स्थिति और भी ज्यादा खराब है। यहां हाईवे की साइड पटरियों पर कंडम वाहन व वर्कशाप संचालक काबिज हैं। तो वहीं सड़क पर मरम्मत के लिए आने वाले ट्रक व अन्य वाहनों को खड़ा किया जाता है।

इनकी आड़ में कई वाहन चालकों ने हाईवे को ही पार्किंग बना लिया है। स्थिति यह कि बुकिंग न मिलने पर ये वाहन कई-कई दिन तक खड़े रहते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग की पेट्रोलिंग टीम से लेकर पुलिस व परिवहन विभाग के अधिकारी भी इनको अनदेखा करके निकल जाते हैं।

नियमों की अनदेखी करके सड़क पर खड़े ये वाहन हादसों का कारण बनते हैं। यह स्थिति तब जबकि दो माह पूर्व डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह स्वयं निवाजपुर सहित सभी राजमार्गों पर इस तरह खड़े होने वाले वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई निर्देश दिए, पर उनकी बात सुनने को ही अधिकारी तैयार नहीं हैं।

कोहरे में बनेंगे दुर्घटना का कारण

कुछ दिन बाद कोहरा पड़ने लगेगा, ऐसे में सुबह व रात के समय ये वाहन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। निवाजपुर तिराहा से महाराणा प्रताप पार्क तक सड़क के दोनों ओर वर्कशाप बनी हैं। सड़क पर ही महीनों से खराब पुराने वाहन व ट्रक खड़े हैं।

सड़क किनारे खड़े पुराने और खराब वाहनों के कारण करीब 300 मीटर का क्षेत्र वाहन स्टैंड और वर्कशाप में तब्दील हो गया है। 30 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क के दोनों ओर दो से तीन कतार में वाहन खड़े होने के बाद आवागमन के लिए पर्याप्त जगह तक नहीं बचती है।

एक दूसरे की जिम्मेदारी बता रहे अधिकारी

एनएचएआइ के सहायक अभियंता पुष्पेश यादव ने बताया कि एक्सीडेंटल राहत टीम वाहनों को हटवाती है। कार्रवाई व चालान की जिम्मेदारी एआरटीओ व यातायात पुलिस की है।

पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता महेंद्र पाल ने भी इन्हीं दोनों विभागों को जिम्मेदार बताया। एआरटीओ प्रवर्तन हरिआेम ने कहा कि चालान करते हैं, ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, उस पर संतोषजनक जवाब न दे सके।

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