शाहजहांपुर की गोशालाओं में दिल दहलाने वाला मंजर: घुटनों तक पानी, कीचड़ में तड़प रहे बेजुबान; ना चारा मिला ना इलाज
शाहजहांपुर की गोशालाओं में बारिश के कारण घुटनों तक पानी भर गया है, जिससे बेजुबान जानवर कीचड़ में तड़प रहे ...और पढ़ें

मोहद्दीनपुर घटियुरा की गोशाला में गंदगी के बीच पड़ी गाय और अल्हागंज के नगला हलु गोशाला में पड़ा बछड़ा। जागरण
HighLights
जिले की तमाम गोशालाओं में घुटनों तक भर गया पानी, बैठ तक नहीं पा रहे बेजुबान
अजयवीर सिंह, शाहजहांपुर। बरसात इंसानों के साथ-साथ बेजुबानों के लिए भी मुसीबत बन गई। सोमवार को जब गोशालाओं की पड़ताल की गई तो हालात बेहद दर्दनाक मिले। कहीं घुटनों तक पानी भरा मिला तो कहीं गोशाला तक पहुंचने का रास्ता ही नहीं बचा। पानी की वजह से कैद हुए बेजुबान, कीचड़ में तड़पते दिखे। हरा चारा मिलना तो दूर बीमार व घायल पशुओं का उपचार तक नहीं हो पा रहा है।
बाढ़ व बरसात को लेकर पहले से अलर्ट जारी होने के बाद भी प्रशासन समय रहते पशुओं के लिए इंतजाम नहीं कर सका। जिसका खामियाजा बेजुबानों को भुगतना पड़ रहा है।

विकासखंड मिर्जापुर के मोहद्दीनपुर घटियुरा गांव से करीब 500 मीटर दूर स्थित गोशाला में चारों तरफ कीचड़ थी। यहां करीब 80 पशु संरक्षित किए गए जिसमें अधिकांश कीचड़ में खड़े थे जबकि कुछ टीनशेड में खड़े थे।
खाने को हरा चारा तो दूर भूसा तक का इंतजाम नहीं था। चार गाय मरणासन्न अवस्था में मिली। पशु पालकों ने धान कटने पर कुछ पुआल मंगवाया था। कलान के सथरा धर्मपुर गांव की गोशाला में 530 पशु संरक्षित करने का दावा किया गया लेकिन वहां इतने पशु दिखाई नहीं दिए।

पूरे परिसर में घुटनों तक पानी भरा था। टीनशेड के नीचे पशुओं का झुंड खड़ा दिखा जो बैठ नहीं पा रहे थे। गोशालाओं का यह मंजर किसी को भी विचलित कर देगा।विकासखंड अल्हागंज के नगला हलु गांव की गोशाला तक पहुंचना ही खुद में चुनौती था।
करीब 400 मीटर तक कीचड में पैदल चलकर वहां तक पहुंचना पड़ा। गोशाला की बाउंड्रीवाल तक नहीं थी। मुख्य गेट की जगह दो लकड़ी के बल्ली व कांटे रखे थे। परिसर में जलभराव था। 40 पशुओं वाली गोशाला में बच्चों सहित 36 गाय मिली।

एक बच्चा बीमार गंदगी के बीच बीमार पड़ा था लेकिन पशु चिकित्सक देखने नहीं पहुंचे। यहां 15 दिनों से हरा चारा नही पहुंचा जिस वजह से सूखा भूसा ही डाला जा रहा है।
विकासखंड खुटार के सिहुरा खुर्द गोशाला में भी जलभराव होने की वजह से पशुओं के लिए मुसीबत हो गई। विकासखंड ददरौल के धन्यूरा गांव की गोशाला के चारों तरफ पानी भरा है। वहां तक पहुंचने का रास्ता तक नहीं बचा है।

गोशाला के अंदर भी पानी पहुंच गया है। यहां दावा किया जा रहा है कि 500 से अधिक पशुओं की संख्या है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी राजेंद्र प्रताप ने बताया कि जहां जलभराव अधिक हो गया है वहां से पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
चार गोशालाओं से निकाले गए पशु
जिले की चार गोशालाओं को जलभराव व कीचड़ की वजह से खाली करा दिया गया। जिसमे विकासखंड कांट के अमरोहा गांव की शाला से 267 पशु निकाले गए। जबकि जैतीपुर के सिऊरा गांव की गोशाला से 98 पशुओं को निकाला गया है।

इसके अलावा निगोही के चकबरैंचा गांव की गोशाला से 75 जबकि भगवानीपुर गांव की गोशाला से 72 पशु को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।
सड़कों को बनाया ठिकाना
बाढ़ व बरसात की वजह से बेसहारा पशुओं ने सड़कों को अपना ठिकाना बना लिया। गोशालाओं में भी पशुओं की संख्या बेहद कम नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं को गोशालाओं से भी निकालकर छोड़ दिया जा रहा है।
