विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'संवाद ही नहीं, मर्यादा भी जरूरी': ओसीएफ रामलीला में राम-सीता का किरदार निभा रहे कलाकारों ने साझा किए अनुभव

Published: Sat, 10 Oct 2026 07:00 PM (IST)

शाहजहांपुर में ओसीएफ श्रीरामलीला का मंचन शनिवार से शुरू हो गया है, जहाँ कलाकार संवाद, भाव और अभिनय से पात्रों ...और पढ़ें

सौरभ सक्‍सेना, विनोद पांडे, अनामिका और रानी मिश्रा

सौरभ सक्‍सेना, विनोद पांडे, अनामिका और रानी मिश्रा

HighLights

  1. अभिनय के साथ पात्रों की मर्यादा बनाए रखना भी कलाकारों के लिए चुनौती

जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। ओसीएफ श्रीरामलीला का मंचन शनिवार से शुरू हो गया। मंच पर उतरते ही कलाकारों की कई दिनों की तैयारी और अभ्यास की परीक्षा शुरू हुई। संवादों की अदायगी, चेहरे के भाव और पात्रों के अनुरूप हाव-भाव के जरिए वे अपने किरदारों को जीवंत करने की कोशिश करते नजर आए।

किसी के लिए यह अभिनय के प्रति समर्पण दिखाने का अवसर है, तो किसी के लिए आस्था से जुड़ी जिम्मेदारी। रामलीला के अलग-अलग पात्र निभाने वाले कलाकारों के सामने दर्शकों को प्रसंगों से जोड़ने की चुनौती है।

भगवान राम और माता सीता के आदर्शों को प्रस्तुत करने से लेकर अन्य पात्रों के स्वभाव और व्यक्तित्व को मंच पर उतारने तक, हर भूमिका के लिए अलग तैयारी जरूरी है। कलाकारों का कहना है कि केवल संवाद याद करना पर्याप्त नहीं; पात्र के भाव, उसकी मर्यादा और प्रसंग की संवेदनशीलता समझना भी जरूरी है।

मंच और पर्दे के पीछे, दोनों जगह जिम्मेदारी

वर्ष 2008 से फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला से जुड़े विनोद पांडे मंच पर अभिनय के साथ पर्दे के पीछे की व्यवस्थाएं भी संभालते हैं। कलाकारों को समय पर जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने और मंचन सुचारु रखने का ध्यान रखना पड़ता है। पूरी प्रस्तुति बेहतर हो, इसके लिए सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होती है।

केसरी के किरदार को प्रभावी बनाएंगे सौरभ

रामलीला में केसरी की भूमिका निभा रहे सौरभ सक्सेना ने कहा कि किरदार को प्रभावी बनाने के लिए संवाद अदायगी के साथ शारीरिक हाव-भाव और चेहरे के भावों पर ध्यान दिया है। कोशिश है कि दर्शक अभिनय के माध्यम से पात्र के व्यक्तित्व को महसूस कर सकें।

हर पात्र के लिए अलग भाव-भंगिमा जरूरी

वर्ष 2019 से फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला से जुड़ीं अनामिका उमा, पार्वती, सती, सुलोचना और कैकेयी जैसे पात्र निभाएंगी। उनके अनुसार हर किरदार का स्वभाव और भाव-भंगिमा अलग होती है। संवादों के साथ चेहरे के भावों का तालमेल जरूरी है, ताकि दर्शक पात्र से जुड़ाव महसूस कर सकें।

माता सीता के किरदार में मर्यादा का ध्यान

वर्ष 2022 से माता सीता की भूमिका निभा रहीं रानी मिश्रा ने कहा कि इस किरदार में धैर्य, करुणा, मर्यादा और आत्मविश्वास को सहज भावों के साथ प्रस्तुत करना जरूरी है। हर बार मंच पर उतरने से पहले उत्सुकता रहती है। इस बार भी संवादों की शुद्धता और भावों की सहजता पर विशेष ध्यान रहेगा।

यह भी पढ़ें- थानों के चक्कर काटने से मिला छुटकारा! शाहजहांपुर में हर महीने 1800 से ज्यादा शिकायतें घर बैठे दर्ज