शाहजहांपुर : गायत्री शक्तिपीठ अध्यात्मिक व सामाजिक चेतना का केंद्र है। यहां पर सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों के अलावा उपनयन, यज्ञोपवीत जैसे संस्कार ही नहीं होते हैं बल्कि सरोकारों का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। गंगा सफाई अभियान, पर्यावरण संरक्षण, कुरीति उन्मूलन आदि इसी का हिस्सा हैं। करीब तीन दशक पहले गौहरपुरा में स्थापित हुआ गायत्री शक्तिपीठ सामाजिक चेतना व अध्यात्मिक शक्ति का केंद्र बना हुआ है। यहां गायन, वादन, स्वावलंबन, प्रवचन के लिए शांतिकुंज के निर्देशन में प्रशिक्षण शिविर भी चलते हैं।

वर्ष भर होते हैं यज्ञ व संस्कार

पूरे वर्ष गायत्री शक्तिपीठ में दैनिक यज्ञ व संस्कार होते। नवरात्र के शुभारंभ पर पांच कुंडीय व समापन पर नौ कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया जाता। वसंत पर्व, गायत्री जयंती को त्योहार के रूप में धूमधाम से मनाया जाता। मान्यता है कि शक्तिपीठ में किए गए अनुष्ठान से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि यहां किया गया अनुष्ठान त्वरित फल देता है।

गायत्री शक्तिपीठ में निस्वार्थ भाव से किए गए जप, यज्ञ से अलौकिक शक्ति की अनुभूति होती है। यहां राष्ट्र व समाजहित के लिए ¨चतन भी किया जाता है।

राजाराम मौर्य, शक्तिपीठ प्रभारी

गायत्री शक्तिपीठ अपने सामाजिक दायित्वों को भी निभा रहा है। अब तक सैंकड़ों कन्याओं का दहेज रहित विवाह कराया जा चुका है।

उर्मिला ठाकुर।

Posted By: Jagran

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