गेम की लत में घर से भागे, दुष्कर्म और चोरी तक की... अलर्ट करने वाली है शाहजहांपुर सुधार गृह में बंद 40 बच्चों की ये कहानी
बच्चों में मोबाइल और ऑनलाइन गेम की लत गंभीर अपराधों का कारण बन रही है, जिसमें घर से भागना, चोरी ...और पढ़ें

एआई इमेज
HighLights
बाल सुधार गृह में बंद हैं 40 नाबालिग, कई मोबाइल की वजह से गलत रास्ते पर पहुंचे
अजयवीर सिंह, शाहजहांपुर। बच्चों की नादानी और अभिभावकों की अनदेखी के कारण मोबाइल और आनलाइन गेम आज बच्चों की दुनिया पर हावी होते जा रहे हैं। हाल ही में सिंधौली में 50 हजार रुपये लेकर घर से भागे तीन किशोरों की घटना केवल एक किस्सा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है।
15 वर्ष का किशोर न केवल फ्री-फायर गेम के लिए घर से रुपये लेकर निकला, बल्कि 12 वर्षीय दो दोस्तों को भी साथ ले गया। यह न केवल उसकी नादानी है, बल्कि इसके पीछे अभिभावकों की अनदेखी भी एक बड़ी वजह है।
बच्चे घंटों मोबाइल पर गेम खेलते रहे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। पिता ने गुस्से में मोबाइल तोड़ दिया, लेकिन संवाद नहीं किया। बच्चे की गेम की आदत और उसकी मनोदशा को समझने की कोशिश नहीं की गई।
आज अभिभावक बच्चों को समय देने के बजाय मोबाइल थमा कर निश्चिंत हो जाते हैं। बच्चों को डांटना आसान है, लेकिन समझना मुश्किल। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के दोस्त बनें।
उनके डिजिटल व्यवहार पर नजर रखें और समय रहते सही मार्गदर्शन दें, वरना यह नादानी किसी बड़े हादसे में बदल सकती है। वर्तमान में बाल सुधार गृह में 40 नाबालिग बंद हैं, जिनमें से कई मोबाइल की वजह से गलत रास्ते पर पहुंच गए हैं।
ऑनलाइन गेम में रुपये हारने पर कर ली चोरी
निगोही के एक गांव निवासी युवक ने मई में आनलाइन गेम में रुपये हारने के बाद मां और बहन के जेवर चोरी कर बेच दिए थे। उसने कुछ जेवर भूसे में छिपा दिए थे और स्वजन को चोरी की सूचना दे दी थी, लेकिन पुलिस की जांच में सच्चाई सामने आ गई।
अश्लील वीडियो देख किया दुष्कर्म
तिलहर में अगस्त में पांच नाबालिगों पर आरोप लगा था कि उन्होंने आठ वर्ष की बालिका के साथ खेत में सामूहिक दुष्कर्म किया। सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच में पता चला कि ये बच्चे मोबाइल में अश्लील वीडियो देखते थे।
अचानक मोबाइल छीनना समाधान नहीं
मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि 12–13 वर्ष की उम्र में बच्चों के लिए मोबाइल और ऑनलाइन गेम केवल मनोरंजन नहीं होते। गेम में मिलने वाला तुरंत इनाम, जीतने की खुशी और लगातार मिलने वाले नए लक्ष्य बच्चों को बार-बार उसकी ओर आकर्षित कर सकते हैं।
अचानक पूरी तरह मोबाइल छीनना समाधान नहीं है। मोबाइल को लेकर स्पष्ट और पहले से तय नियम बनाएं। कितनी देर, कब और किन परिस्थितियों में मोबाइल इस्तेमाल किया जा सकता है।
नियम बच्चे को समझाकर और उसकी उम्र के अनुसार तय करें। बच्चे से पूछें कि वह कौन-सा गेम खेलता है, उसमें उसे क्या अच्छा लगता है और उसके दोस्त भी उसे खेलते हैं या नहीं। बच्चे की रुचि को समझना संवाद का रास्ता खोलता है।
