जेएनएन, शाहजहांपुर : चार दिन से बलिदानी पति सारज सिंह की झलक पाने को बेताब वीरनारी रंजीत कौर घर में शव आते ही दौड़ पड़ी। ताबूत खुलते ही सारज का चेहरा देखा और बेहोश हो गई। अंतिम संस्कार तक वह करीब तीन बार बेहोश हुईं। वीर पति के सम्मान में आंसू भी नहीं निकलने दिए।

अंतिम विदाई के बाद सुहाग की निशानी के रूप में पार्थिव देह का तिरंगा लेकर जब घर लौटी तब वीरनारी ने गम के बीच गौरवान्वित होकर मन के विचार रखे। बोली भारतमाता की रक्षा के लिए सुहाग के न्योछावर होने पर गर्व है। वह देश वास्ते कहकर गए थे। बोले थे, जल्द आएंगे। वह चले गए, लेकिन देश वास्ते वादाखिलाफी कर गए। लेकिन उनकी यादों के साथ तिरंगे के सहारे जिदगी काट लूंगी। बेटा होता तो उसे भी भेज देती सेना में

रंजीत कौर और सारज सिंह दो साल ही साथ जिदगी बिता पाए। परिवार में भाई गुरुप्रीत की दो तथा सुखवीर की एक बेटी है। रंजीत ने कहा कि अगर उनका बेटा होता तो उसे भी देश वास्ते सेना में भेज देती। । तीन बार बेहोश हुईं रंजीत, नापा गया ब्लड प्रेशर

पति सारज सिंह को याद कर वीर नारी रंजीत तीन बार बेहोश हो गई। उन्हें परिवारीजनों ने संभाला। चिकित्सकों ने रंजीत का ब्लड प्रेशर भी चेक किया। खुले डिग्री कालेज, बने स्टेडियम

रंजीत कौर ने कहा कि पति की याद में गांव में स्टेडियम, डिग्री कालेज तथा गांव तक पक्की सड़क बननी चाहिए। कहा कि स्मृति द्वार और चिता स्थल पर पार्क भी बने, ताकि क्षेत्र के अन्य युवा प्रेरणा लेकर सेना में भर्ती हो सकें। सारज सिंह की मां परमजीत कौर, मामी सतवीर कौर भी सहमत थीं।

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