गंगा एक्सप्रेसवे पर जानलेवा स्पीड, 6 महीने में 40 हादसे और 12 मौतें... फिर भी चालान ZERO!
गंगा एक्सप्रेसवे पर छह महीने में 40 से अधिक हादसों में 12 लोगों की जान जा चुकी है, बावजूद इसके ...और पढ़ें

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HighLights
तेज गति, गलत तरीके से वाहन खड़े करना या चालक को झपकी मुख्य कारण
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। गंगा एक्सप्रेसवे पर गढ़िया रंगीन में बुधवार को कुत्ते का शव पड़ा था। दिल्ली जा रहे अयोध्या निवासी व्यापारी अरविंद इससे अनभिज्ञ थे। अचानक कुत्ते का शव दिखा तो उसे बचाने का प्रयास किया और कार अनियंत्रित होकर पलट गई। अरविंद व उनकी बेटी आर्या की मृत्यु हो गई।
एक्सप्रेसवे ने भले ही पश्चिम से पूरब के बीच दूरी कम की हो, लेकिन सुरक्षित सफर के दावे अब भी अधूरे हैं। आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। लोगों घायल हो रहे है। उनकी जान जा रही है।
हादसों का बड़ा कारण नियमों की अनदेखी है, लेकिन ऐसा करने वाले वाहन चालकों पर सख्ती नहीं हो रही। छह माह हो चुके हैं, पर अब तक एक भी चालान नहीं हुआ है।
जिले में 44 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर छह महीने में 40 से अधिक हादसे हुए, जिनमें 12 लोगों की जान जा चुकी। अधिकतर हादसों का कारण बेसहारा पशु, ओवरस्पीडिंग, गलत तरीके से वाहन खड़े करना या चालक को झपकी आना था।
इसके बावजूद नियमों का पालन कराने में सख्ती नहीं बरती जा रही। 120 किमी प्रति घंटा की गति के हिसाब से डिजाइन एक्सप्रेसवे का उप्र एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण की निगरानी में अदाणी समूह संचालन करता है।
नियम तोड़ने वाले चालकों के प्रति नरमी के पीछे प्रमुख वजह अपेक्षा से कम ट्रैफिक लोड माना जा रहा है। आरंभिक सर्वे के दौरान प्रतिदिन आठ से दस हजार वाहनों की आवाजाही का अनुमान लगाया गया था, जिनसे टोल टैक्स प्राप्त होता।
इससे इतर, इस पर रोज औसतन छह से सात हजार वाहनों की आवाजाही ही हो रही है। ऐसे में सख्ती होने पर वाहन चालकों के राष्ट्रीय राजमार्ग का रुख करने की आशंका है।
हालांकि एक्सप्रेसवे पर सफर सुरक्षित बनाने के लिए जिले की सीमा में 700 से अधिक कैमरे लगे हैं, जिनके माध्यम से कंट्रोल रूम से निगरानी की व्यवस्था है।
प्रतिदिन कंट्रोल रूम से गलत पार्किंग, ओवरस्पीड पर 25 से 30 वाहन चालकों को चेतावनी भी जारी होती है। छह पेट्रोलिंग टीमें गलत तरीके से खड़े किए गए वाहनों के साथ ही बेसहारा पशुओं को भी हटवाने का काम करती हैं।
प्रत्येक 75 किमी. पर रेस्ट रूम व कैंटीन बनाई गईं हैं, लेकिन इन पर ठहराव लेने वाले वाहन चालकों की संख्या काफी कम है। यूपीडा के अवर अभियंता मनीष सिंह ने बताया कि कोई चालक गलत तरीके से वाहन खड़ा करता है।
अनुमन्य गति से अधिक पर वाहन चलाता है तो कंट्रोल रूम के जरिए सूचना देकर पेट्रोलिंग टीम को भेजा जाता है। पशुओं की संख्या अब कम हुई है, लेकिन इन पर भी नजर रखी जाती है।
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