गन्ने के 'कैंसर' का तोड़: 10 साल के शोध के बाद तैयार हुई प्रजाति 'Co.Sha 23232', बदलेगी किसानों की किस्मत
शाहजहांपुर के गन्ना शोध परिषद ने लाल सड़न रोग प्रतिरोधी और अधिक उपज देने वाली नई गन्ना प्रजाति को.शा 23232 ...और पढ़ें

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- शाहजहांपुर के गन्ना शोध परिषद ने तैयार की को.शा 23232
अंबुज मिश्र, शाहजहांपुर। अधिक उत्पादन देेने और लाल सड़न रोग को मात देने वाली गन्ना प्रजाति को.शा 23232 आगामी 15 दिन खेतों में पहुंचने लगेगी। 10 वर्ष अनुसंधान के बाद गन्ना शोध परिषद ने इसे तैयार किया है। शीतकालीन सत्र में प्रदेश के दो हजार गन्ना किसान इस प्रजाति की उपज लेंगे।
उनके खेतों में तैयार गन्ने को बीज के रूप में भी अन्य किसानों तक पहुंचाने की योजना है। लंबे इंतजार के बाद किसानों को गन्ने की मानक प्रजाति को. 0238 का बेहतर विकल्प मिला है।
को. 0238 प्रजाति को उत्पादन एवं चीनी परता के दृष्टि से श्रेष्ठ माना जाता था, मगर इसमें लाल सड़न (कैंसर) रोग लग गया। इस रोग के कारण उत्पादन एवं चीनी परता कम होता जाता है।
कोई विकल्प नहीं होने के कारण गन्ना बहुलता वाले प्रदेश के 45 जिलों के किसान इसे छोड़ नहीं पा रहे थे। यह रोग वर्ष 2016 में सामने आ चुका था, उसी समय गन्ना शोध परिषद ने विकल्प पर अनुसंधान शुरू कर दिया।
विज्ञानी डाॅ. अरविंद कुमार ने दक्षिण व उत्तर भारत की गन्ना प्रजातियों के मेल से नई प्रजाति की रूपरेखा बनाई। इसके लिए कोयम्बटूर की गन्ना प्रजाति 775 व गन्ना शोध परिषद की 8119 प्रजाति का संकरण कराया।
इससे तैयार अगेती प्रजाति को को.शा 23232 नाम दिया, जिसमें ''को'' का अर्थ कोयम्बटूर एवं ''शा'' का अर्थ शाहजहांपुर है। परीक्षण में को.शा 23232 का चीनी परता 13.10 से 14.31 तक पाया गया, जो 0238 प्रजाति की तुलना में .24 प्रतिशत अधिक है।
इसकी अगेती उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर रही, यह भी 0238 से 9.44 प्रतिशत अधिक है। पेड़ी का उत्पादन 80.57 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मिला, जो 0238 से तीन प्रतिशत अधिक है।
इस प्रजाति को बनाते समय लाल सड़न रोग रोधी क्षमता दी गई। जनवरी में सभी परीक्षण के बाद इसके उत्पादन की अनुमति का प्रस्ताव लखनऊ भेजा गया। 30 सितंबर को गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में उपसमिति ने इस प्रजाति के उत्पादन को अनुमति दे दी।
निदेशक अभिषेक आनंद की निगरानी में नौ अक्टूबर को गन्ना शोध परिषद ने अपनी वेबसाइट पर नई प्रजाति की पौध की आनलाइन बुकिंग खोली तो पांच मिनट में ही दो लाख पौध बुक हो गईं।
यह पहला अवसर है कि नई प्रजाति के रिलीज होने के एक माह के अंदर पौध वितरण किया जा रहा, पूर्व में एक वर्ष तक लगता था। एक मिनी सीड किट में 100 बड (पौध) होते हैं। प्रत्येक बड के बदले दो रुपये शुल्क लिया जाता है। 100 बड से किसान एक वर्ष में एक एकड़ गन्ना बीज तैयार कर सकते हैं। नई प्रजाति की पौध की दूसरी खेप भी तैयार हो रही, जिसका वितरण फरवरी में होगा।
- डाॅ. संजीव पाठक, प्रसार अधिकारी, गन्ना शोध परिषद
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