संतकबीर नगर : कोरोना संक्रमित होकर ठीक हो चुके लोग अब लोगों को हौसला दे रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना से डरकर नहीं लड़कर ही जीता जा सकता है। यह ऐसी बीमारी नहीं है कि यदि हम इसकी जद में आ गए तो मौत हो जाएगी। यदि हम नियम व संयम से रहते हुए इस बीमारी से लड़ेंगे तो यह खत्म हो जाएगी। हमें नकारात्मक नहीं होना है। सकारात्मक रहकर ही हम कोरोना को हरा सकते हैं।

कोरोना को पछाड़ने के लिए शासन की गाइडलाइन का पालन करें। गरम पानी, भाप, काढ़ा के साथ अन्य घरेलू उपचार करें। मास्क का प्रयोग जरूर करें। शारीरिक दूरी के साथ ही भीड़भाड़ में जाने से बचें। जैसे ही कोरोना का लक्षण दिखे, तत्काल जांच कराएं और चिकित्सक की सलाह पर दवाएं लेना शुरू कर दें।

खलीलाबाद के तितौआ मोहल्ले के प्रियव्रत प्रकाश द्विवेदी बताते हैं कि वह कल्पादेवी रामदेव राय इंटर कालेज में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं। पहली लहर में ही वह कोरोना पाजिटिव हो गए थे। परिवार में दो छोटे बच्चे और पत्नी हैं। जब उनके संक्रमित होने की जानकारी हुई तो बच्चे डर के मारे रोने लगे। लेकिन मैंने सभी को हौसला दिया। घर के एक कमरे में खुद को अलग कर लिया। डाक्टर की सलाह और परिवार विशेषकर पत्नी का सहयोग मिला। सकारात्मक सोच, योग और प्रणायाम से घर में ही रहकर कोरोना की जंग जीत ली। कोरोना में जरूरी है कि हम सकारात्मक रहकर कोविड नियमों का पालन करें। कोरोना से डरकर नहीं लड़कर जीता जा सकता है।

रमेश चंद पांडेय बताते हैं कि दूसरी लहर में वह कोरोना की चपेट में आ गए थे। इसका पता उन्हें तब लगा जब वह मतगणना में एजेंट बनने के लिए बीते अप्रैल को अपना कोरोना जांच करवाए। रिपोर्ट पाजिटिव आने के बाद उन्होंने खुद को घर में अलग कर लिया। अस्पताल से मिली दवा और घरेलू उपचार करते रहे। वह कहते हैं कि किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए अपनों का साथ और खुद पर विश्वास होना जरूरी है। कोरोना वायरस से लड़ने में टीका जरूरी है। जो भी पात्र हैं उन्हें समय से टीका जरूर लगवा लेना चाहिए। कोरोना होने के बाद हमें डरना नहीं है। यदि हम नियम का पालन करते हुए सकारात्मक रहेंगे तो यह कुछ नहीं कर पाएगा।