पिता की निधन के बाद भी हार नहीं मानी उर्मिला, हाथ में हथौड़ा थाम कर गढ़ रहीं तकदीर; अब युवाओं को दे रहीं रोजगार
पिता के निधन के बाद उर्मिला विश्वकर्मा ने लोहे का कारोबार संभाला और परिवार को संकट से उबारा। आज वह ...और पढ़ें
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उर्मिला विश्वकर्मा अब हाथ में हथौड़ा थाम गढ़ रहीं तकदीर।
HighLights
पिता के निधन के बाद संभाला लोहे का कारोबार।
मलौली में कारखाना चलाकर युवाओं को दे रहीं प्रशिक्षण।
दो दर्जन से अधिक युवाओं को बनाया आत्मनिर्भर।
सुदर्शन प्रसाद त्रिपाठी, मलौली। मुश्किल परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय उनसे संघर्ष कर अपनी तकदीर लिखने वाले लोग समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं। ऐसी ही एक संघर्षशील महिला हैं नगर पंचायत हैंसर बाजार धनघटा के किठिउरी मोहल्ला निवासी 42 वर्षीय उर्मिला विश्वकर्मा।
उन्होंने परिवार पर आए संकट के बीच न केवल लोहे का कारोबार संभाला, बल्कि अपनी मेहनत और लगन से परिवार को सहारा दिया। आज वह मलौली चौराहे पर लोहे का कारखाना संचालित कर रही हैं और क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार की राह दिखा रही हैं।
उर्मिला की संघर्ष यात्रा वर्ष 1999 में शुरू हुई, जब वह हाईस्कूल की छात्रा थीं। उनके पिता रामबक्श लोहे के सामान बनाने का काम करते थे। इसी व्यवसाय से छह संतानों वाले परिवार का भरण-पोषण होता था। उर्मिला भी समय-समय पर पिता के काम में हाथ बंटाती थीं।
इसी दौरान काम करते समय उनके पिता को लोहे से गंभीर चोट लग गई, जिससे कारोबार बंद होने की नौबत आ गई। परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। ऐसे कठिन समय में उर्मिला ने हिम्मत नहीं हारी। पढ़ाई के साथ हाथ में हथौड़ा थामकर पिता का कारोबार संभालने की जिम्मेदारी उठा ली। कुछ समय बाद चोट के कारण उनके पिता टिटनेस की चपेट में आ गए।
उर्मिला ने उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। पिता के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इसके बावजूद उर्मिला ने हार मानने के बजाय परिवार को संभालने का संकल्प लिया और अविवाहित रहकर अपने परिजनों की जिम्मेदारी निभाने में जुट गईं।
उर्मिला ने अपने हुनर, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर लोहे के कारोबार को आगे बढ़ाया। आज वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि दूसरे लोगों को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके हाथों की हथौड़े की चोट लोहे को आकार देने के साथ-साथ संघर्षों से जूझने का संदेश भी देती है।
युवाओं को दे रहीं लोहे के कारोबार का प्रशिक्षण
उर्मिला विश्वकर्मा अपने कारखाने पर आने वाले बेरोजगार युवाओं को लोहे के सामान बनाने और इस कारोबार की बारीकियां सीखने का अवसर देती हैं। उनका उद्देश्य युवाओं को हुनरमंद बनाकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है।
खास बात यह है कि उनकी मेहनत और सफलता से प्रभावित होकर कुछ बेटियां भी इस व्यवसाय को अपनाने में रुचि दिखा रही हैं। उर्मिला का मानना है कि हुनर और मेहनत के दम पर युवा अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बना सकते हैं।
दो दर्जन से अधिक युवाओं को बनाया स्वावलंबी
उर्मिला बताती हैं कि अब तक वह अपने कारखाने पर दो दर्जन से अधिक युवाओं को लोहे के कारोबार का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इनमें से कई युवा अपने-अपने क्षेत्रों में कारोबार कर रहे हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं।
