योगी सरकार की इस योजना में 150 बुनकरों का चयन, पावरलूम मशीन और भवन निर्माण के लिए मिलेगा सरकारी अनुदान
संतकबीरनगर में मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम विकास योजना के तहत 150 बुनकरों का चयन हुआ है। इन्हें पावरलूम मशीन खरीदने ...और पढ़ें

HighLights
मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम योजना से 150 बुनकर चयनित।
पावरलूम मशीन व भवन निर्माण हेतु सरकारी अनुदान मिलेगा।
बुनकरों की आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार आएगा।
दिलीप पाण्डेय, संतकबीरनगर। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग से संचालित मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम विकास योजना से जनपद के चयनित 150 बुनकर विकास की कहानी लिखेंगे। इनके पास सरकारी अनुदान पर स्वयं का पावरलूम मशीन व संचालन के लिए भवन होगा। लूंगी, तौलिया, गमछा सहित अन्य उत्पाद तैयार करेंगे। इनकी आर्थिक स्थिति में पहले की अपेक्षा काफी बदलाव आएगा। इनके घर-परिवार में खुशहाली आएगी।
पावरलूम की स्थापना के लिए चयनित हुए 150 बुनकर
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग से संचालित मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम विकास योजना चल रही है। इसके तहत खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के अंसार टोला, अमरडोभा, बखिरा, लेडुआ-महुआ, नौरो वहीं मेंहदावल तहसील क्षेत्र के बारागद्दी, ठाकुरद्वारा एवं अन्य बुनकर बाहुल्य गांवों के लोगों ने सरकारी अनुदान पर पावरलूम स्थापित करने के लिए विभागीय पोर्टल पर आनलाइन आवेदन किया था।
कुल 220 आनलाइन आवेदन प्राप्त हुए। इसके बाद विभागीय टीम आवेदकों के पास पहुंच कर सत्यापन की थी। इस दौरान कुछ बुनकरों के पास पावरलूम की स्थापना के लिए निर्धारित क्षेत्रफल में भूमि नहीं थी।
वहीं, कई बुनकर निर्धारित लाभार्थी अंश अदा कर पाने में असमर्थता जताई। इसके कारण 70 आवेदकों का आवेदन निरस्त हो गया। शेष 150 बुनकर इस योजना से लाभान्वित करने के लिए चयनित कर लिए गए हैं। उन्हें पावरलूम की स्थापना के लिए जल्द सरकारी अनुदान मिलेगा।
मशीन खरीदने व भवन निर्माण पर अनुदान
मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम विकास योजना के तहत प्रत्येक चयनित लाभार्थी को दो पावरलूम दिए जाने का प्रविधान है। इस योजना के तहत एक पावरलूम मशीन खरीदने के लिए प्रदेश सरकार 90 हजार रुपये अनुदान देती है, वहीं शेष 60 हजार रुपये लाभार्थी को स्वयं लगाना पड़ता है।
इसके अलावा पावरलूम मशीन के संचालन के लिए भवन निर्माण के लिए कम से कम 500 वर्ग फीट भूमि होनी चाहिए। इसके लिए प्रदेश सरकार प्रत्येक लाभार्थी को डेढ़ लाख रुपये अनुदान देती है, शेष धनराशि लाभार्थी को स्वयं वहन करनी पड़ती है।
टीम ने की थी आवेदकों की जांच
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग में कार्यरत वस्त्र निरीक्षक राकेश पाण्डेय व विद्यापति मिश्र के नेतृत्व में विभागीय टीम ने आनलाइन आवेदन प्राप्त होने के बाद आवेदकों के घर पर पहुंचकर जांच की थी।
निर्धारित मानक पर खरा उतरने वालों का चयन किया था। इन्होंने कहा कि जनपद के बुनकर इस योजना से लाभान्वित होने के लिए विभागीय पोर्टल अब भी आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
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