उत्तर प्रदेश में पराली जलाई तो खैर नहीं, 15 हजार जुर्माना लगेगा; सैटेलाइट से की जाएगी निगरानी
संतकबीरनगर में जिलाधिकारी ने किसानों से धान की पराली न जलाने की अपील की है, क्योंकि इससे भूमि की उर्वरा शक्ति घटती है और वायु प्रदूषण बढ़ता है।

तस्वीर- फाइल।
HighLights
पराली जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति घटती है।
एनजीटी ने पराली जलाने पर भारी जुर्माना तय किया।
सैटेलाइट से पराली जलाने की नियमित निगरानी होगी।
जागरण संवाददाता, संतकबीरनगर। डीएम अनुज मलिक ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि धान फसल की कटाई के बाद खेतों में डंठल को कदापि न जलाएं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति घटती है। लाभकारी सूक्ष्म जीव जलकर नष्ट हो जाते हैं। पैदावार पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो जाती है। वायु अत्यधिक प्रदूषित हो जाती है। यह आम जनमानस के सेहत के लिए काफी हानिकारक है। डंठल जलाने के दौरान आग लग जाती है। इससे घर जल जाने,जन, पशु की मृत्यु तक हो जाती है।
उन्होंने कहा कि खेत को जोतवाकर पराली को मिट्टी में मिला देना चाहिए। इससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों,लाभकारी सूक्ष्म जीवों,जल धारण क्षमता बढ़ती है। दलहन फसलों के अवशेष से मिट्टी में नाइट्रोजन व अन्य पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है।
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण(एनजीटी)-नई दिल्ली ने पराली जलाने पर क्षेत्रफल के अनुसार अर्थदंड निर्धारित किया है। दो एकड़ से कम पर 2,500 रुपये, दो से पांच एकड़ पर पांच हजार रुपये,पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल पर संबंधित किसान से 15 हजार रुपये जुर्माना प्रति घटना वसूली जाएगी।
इसके साथ ही दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी प्राविधान किया गया है। इसके साथ ही बिना रीपर के कंबाइन से धान फसल काटने वाले मालिकों पर भी कार्रवाई होगी। वे कार्रवाई से बचने के लिए रीपर लगाकर कंबाइन से फसल कटवाएं। सैटेलाइट से इसकी नियमित निगरानी होगी। लेखपाल,पंचायत सचिव सहित अन्य कर्मियों की ड्यूटी निगरानी के लिए लगाई गई है।
