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जम्मू: कटाई से पहले खेतों में बिछ गई धान की फसल, सांबा के किसानों पर मौसम की दोहरी मार; पराली भी हो सकती है खराब

Published: Sun, 11 Oct 2026 07:00 AM (IST)

सांबा जिले के सीमांत क्षेत्रों में बारिश और आंधी से धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसान ...और पढ़ें

सांबा में आंधी-बारिश से धान की फसल बर्बाद।

सांबा में आंधी-बारिश से धान की फसल बर्बाद।

HighLights

  1. आंधी और बारिश से सांबा में धान की फसल बिछी।

  2. किसानों को पैदावार कम होने और आर्थिक नुकसान की चिंता।

  3. मौसम की मार से पराली भी बेकार होने का डर।

जागरण संवाददाता, रामगढ़। जिला सांबा के सीमांत क्षेत्रों में बीजी गई धान की फसल पर बारिश के साथ चली आंधी से जो नुकसान पहुंचा है, उससे धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों को डर है कि कहीं उनकी पैदावार की दहलीज पर पहुंची धान की फसल मौसम की मार का शिकार न हो जाए। इससे फसल की पैदावार कम होगी और किसानों को खासा नुकसान हो सकता है।

जम्मू के कुछ जिलों में बीते वीरवार रात को अचानक बदले मौसम से बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। इससे सीमांत क्षेत्रों में लगाई गई धान की फसल खेतों में बिस्तर की तरह बिछ गई। जो फसल खेतों में बिछी है, उसपर पैदावार की बाली नहीं आएगी।

वहीं जो फसल बाली लेकर पैदावार के मुकाम पर है, वो हल्की पड़ने की आशंका नजर आ रही है।

सीमावर्ती गांवों में धान की फसल पर मौसम की मार

सीमावर्ती क्षेत्र रामगढ़ के गांव पंचायत तरिंड़ियां, चक-सलारियां, केसो, खानपुर, पखड़ी, बरोटा, कमोर, कौलपुर, कमोर कैंप, नंगा, रंगूर, नथवाल, कंदराल, अबताल, ड़डेयाल, एसएमपुर, दग, परड़ी, छावनी, नंदपुर, स्वांखा अन्य में धान की फसल मौसम की मार का शिकार हुई है।

फसलों पर पड़े मौसम के प्रहार से चिंतित किसानों ने कहा कि मौजूदा खरीफ सीजन मौसम की मेहरबानी से अपने पूरे रंग में नजर आ रहा था। धान उत्पादक किसानों को उम्मीद थी कि इस बार फसल से बंपर पैदावार नसीब होगी, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी। लेकिन अहम समय पर मौसम अपने रंग दिखाने लगा है, जिससे फसल पर बुरा असर पड़ता नजर आने लगा है।

बारिश से धान के साथ पराली भी खराब होने का डर

किसानों ने कहा कि अगर कहीं आने वाले दिनों में भी बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं, तो खेतों में गिरी फसल खराब हो जाएगी। इससे पैदावार का नुक्सान होगा और मवेशियों का चारा पराली भी बेकार हो जाएगी।

किसान भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि मौसम मेहरबान बना रहे, ताकि उनकी मेहनत व किया गया खर्च मिट्टी में न मिल जाए।