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प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना: संतकबीरनगर में इलाज के लिए कार्ड धारक परेशान, सरकारी डॉक्टर करते हैं टालमटोल

Published: Mon, 02 Nov 2026 03:56 PM (IST)

संतकबीरनगर जिला अस्पताल के चिकित्सक आयुष्मान कार्ड धारकों का उपचार करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

2019-20 के प्रोत्साहन राशि का भुगतान न होने से वे मरीजों के इलाज में हीलाहवाली कर रहे हैं, जिससे 52 लाख से अधिक बकाया है।

2019-20 के प्रोत्साहन राशि का भुगतान न होने से वे मरीजों के इलाज में हीलाहवाली कर रहे हैं, जिससे 52 लाख से अधिक बकाया है।

HighLights

  1. संतकबीरनगर में आयुष्मान कार्ड धारकों का उपचार प्रभावित।

  2. चिकित्सकों को 2019-20 की प्रोत्साहन राशि नहीं मिली।

  3. 52 लाख रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है।

जागरण संवाददाता, संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत विभिन्न विभाग के चिकित्सकों नें बर्ष 2019-20 में 135 आयुष्मान कार्ड धारकों का उपचार किया था, इनमें ऑर्थोपेडिक, जनरल सर्जरी, आई सर्जरी, मेडिसिन समेत अन्य विभाग के डाक्टर शामिल हैं।

शासन का निर्देश है कि यदि सरकारी अस्पतालों में सरकारी चिकित्सक इन कार्ड धारकों का उपचार करते हैं तो उन्हें विभिन्न तरह के केसों में प्रोत्साहन राशि देने का प्राविधान है। लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण इन्हे यह धनराशि नहीं मिल पा रही है। जिसके कारण अब ये आयुष्मान कार्ड से रोगियों के उपचार करने में हीलाहवाली करते हैं।

जिला अस्पताल के चिकित्सकों के द्वारा किये गऐं आंकड़े की बात करें तो इस योजना के तहत वर्ष 2019-20 में 135 मरीजों का विभिन्न चिकित्सकों के द्वारा आपरेशन या उपचार किया गया। इन राेगियों के उपचार में शासन द्वारा समवंधित चिकित्सक को इंसेटिव देने का प्राविधान है। नियमों के अनुसार करीब 52 लाख 4 सौ रूपये बकाया है। यह बकाया कई वर्ष से चला आ रहा है। जब कि जिला अस्पताल में आर्थोपेडिक के मामले अधिक आते है।

आर्थोपेडिक सर्जन डॉ.अमित सिंह, डॉ.एलसी यादव, डॉ.शिव ओम-भूं, डॉ.एसपी सिंह के अलावा अन्य चिकित्सक हैं। वहीं फीजिशियन के अलावा बालरोग विशेषज्ञ डा.भी उपलब्ध हैं। इन चिकित्सकों के द्वारा मरीजों का उपचार तो किया गया है लेकिन इसके बदले में जो इंसेटिब शासन से समवंधित डाक्टर को मिलनी चाहिए वह नही मिल रहा है। इससे ये चिकित्सक आयुष्मान कार्डधारकों के उपचार में हीलाहवाली करते है।

कई चिकित्सक ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि जब शासन के नियमों के तहत निर्धारित की गई धनराशि ही नहीं मिलती तो कैसे कार्य होगा। इस बारे में पूछे जाने पर सीएमएस डॉ.रमाशंकर सिंह ने बताया कि यह धनराशि कई वर्ष पुरानी है। तत्कालीन सीएमएस को नियमों के अनुसार भुगतान करना चाहिए था। इसके लिए पत्राचार किया जायेगा। जैसा शासन का निर्देश होगा नियमों के तहत कार्य किया जायेगा।

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