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संतकबीर नगर में CM योगी की घोषणा के बाद टेक्सटाइल पार्क बनाने के काम में आई तेजी, हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार

Published: Tue, 15 Sep 2026 11:35 AM (IST)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद संत कबीर नगर में बंद पड़ी कताई मिल की जगह टेक्सटाइल पार्क बनाने की गतिविधियों में तेजी आई है।

पहली तस्वीर AI जेनेरेटेड है

पहली तस्वीर AI जेनेरेटेड है

HighLights

  1. सीएम योगी की घोषणा से टेक्सटाइल पार्क निर्माण में तेजी।

  2. पांच हजार से अधिक लोगों को मिलेगा सीधा रोजगार।

  3. बंद कताई मिल की जगह औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा।

जागरण संवाददाता, संतकबीरनगर। सीएम योगी आदित्यनाथ 11 अगस्त 2026 को विकास भवन के निकट स्थित कांशीराम स्पोर्टस् स्टेडियम में आए थे। उन्होंने यहां पर 684 करोड़ की 201 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया था।

उन्होंने बंद चल रही संत कबीर कताई मिल्स लिमिटेड-मगहर में औद्योगिक गतिविधियों को तेज करने की बात की थी। उनकी घोषणा के बाद से प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क बनाने की गतिविधि में तेजी आ गई। इसके संचालित हो जाने पर इस जिले की तस्वीर बदल जाएगी।

प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क के संचालित हो जाने पर पांच हजार से अधिक बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। इसमें सूत से धागा, धागा से कपड़े, उसकी फिनिशिंग, रंगाई, साइजिंग, प्रिंटिंग यूनिट, रेडीमेड गारमेंट आदि बनाए जाएंगे। इसके लिए निवेशकों से आवेदन लिए जाने की कार्यवाही चल रही है।

शासन स्तर से इनका चयन होना है। प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क के संचालन में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विद्युत उप केंद्र स्थापित करने की कार्यवाही भी चल रही है।

कुछ दिन पूर्व ट्रांसमिशन के एसडीओ मनोज कुमार की टीम जांच के लिए बंद चल रही संत कबीर कताई मिल्स लिमिटेड-मगहर में जांच के लिए पहुंची थीं। प्रस्तावित पार्क के लिए कितनी बिजली की आवश्यकता पड़ेगी,इसके आकलन में जुटी है। इसके लिए विद्युत वितरण खंड-खलीलाबाद के एक्सईएन राजेश कुमार व हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के अधिकारियों से वार्ता की थीं।

कताई मिल बंद होने से करीब पांच हजार मजदूरों की छीन गयी थी रोजी

पूर्व में संत कबीर कताई मिल्स लिमिटेड-मगहर में गुजरात के सूरत,अहमदाबाद,वड़ोदरा सहित अन्य जगहों सूत आता था। इसकी कताई करके धागा बनाया जाता था। उस धागे को कपड़ा बनाने वाली मिलों,कपड़ा बनाने वाले छोटे-छाेटे उद्यमियों इसे खरीदते थे। पूर्व में यह जिला बस्ती में शामिल था। इस मिल का बना हुआ धागा

बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, अंबेडकरनगर के टांडा, बाराबंकी, कानपुर, लखनऊ जाता था। इसके अलावा बुनकर भी धागा खरीदते थे। जिससे वे कपड़े तैयार कर और उसे बेचकर आमदनी करते थे। उस समय कृषि के बाद वस्त्र उद्योग सबसे बड़ा माना जाता था।

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वर्तमान की तुलना में उस समय ज्यादा हथकरघा एवं पावरलूम संचालित थे। कई जिलों के बुनकरों का जीवन-यापन इसके सहारे चल रहा था। वर्ष 1990 में इस मिल के बंद होने पर करीब तीन हजार से अधिक कर्मी बेरोजगार हो गए। बुनकर पुश्तैनी धंधा छोड़कर गैर प्रांतों में काम करने लगे थे।

कताई मिल की भूमि की रजिस्ट्री हो गयी है। टेक्सटाइल पार्क की स्थापना व संचालित हो जाने पर औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी। इससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे। व्यापक बदलाव दिखेगा।

                                   सिद्धार्थ सिंह-सहायक आयुक्त, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, परिक्षेत्र-गोरखपुर