संतकबीर नगर में SDM कोर्ट में कानूनी जंग हार गया ब्रिटिश मौलाना, मदरसे की भूमि राज्य सरकार में निहित
संतकबीरनगर में ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा खान और उनके बेटे तौसीफ रजा को मदरसे की भूमि को लेकर चल रही ...और पढ़ें

ब्रिटिश मौलाना के मदरसे की भूमि राज्य सरकार में निहित।
HighLights
एसडीएम कोर्ट ने मौलाना की आपत्तियां खारिज कीं।
मदरसे की 64 एयर भूमि राज्य सरकार में निहित।
ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा खान को बड़ा झटका।
जागरण संवाददाता, संतकबीरनगर। खलीलाबाद के मोतीनगर स्थित गाटा संख्या 154 की 64 एयर भूमि पर बने मदरसे को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा खान और उनके बेटे तौसीफ रजा को एक बार फिर तगड़ा झटका लगा है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर करीब ढाई माह चली सुनवाई के बाद एसडीएम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों, साक्ष्यों और राजस्व कर्मियों की रिपोर्ट का गुण-दोष के आधार पर परीक्षण किया।
इसके बाद मौलाना पिता-पुत्र की आपत्तियों को खारिज करते हुए मदरसे की भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश जारी कर दिया।
मदरसे की भूमि को राज्य सरकार में निहित किए जाने के जिलाधिकारी न्यायालय के 12 फरवरी 2024 के आदेश के खिलाफ मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया (निस्वा) के प्रबंधक तौसीफ रजा ने मंडलायुक्त न्यायालय में अपील की थी। वहां राहत नहीं मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
गत 15 मई 2026 को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि राजस्व संहिता की धारा 104 के तहत भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का अधिकार एसडीएम न्यायालय को है। कोर्ट ने जिलाधिकारी और मंडलायुक्त न्यायालय के आदेश निरस्त करते हुए एसडीएम को मामले की नए सिरे से सुनवाई कर गुण-दोष के आधार पर फैसला करने का निर्देश दिया था।
इसक्रम में एसडीएम कोर्ट ने विदेशी चंदे से ब्रिटिश नागरिकता छिपाकर क्रय की गई मदरसे की भूमि को राज्य सरकार में निहित करने के प्रकरण में 29 मई को वाद दर्ज कर पांच पक्षकारों को नोटिस जारी किया।
मौलाना शमसुल हुदा और उनके बेटे तौसीफ रजा ने अधिवक्ता के माध्यम से अपना पक्ष रखा। शिकायतकर्ता आमिया खातून और नुरुल हक के अलावा सरकारी अधिवक्ता ने भी अपनी दलीलें पेश कीं। करीब ढाई माह तक 12 तिथियों में सुनवाई हुई।
बहस पूरी होने के बाद 14 अगस्त को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को एसडीएम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए मौलाना पिता-पुत्र की आपत्तियां खारिज कर दीं और 64 एयर मदरसे की भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश जारी कर दिया।
बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण पर चला था बुलडोजर
इसी मदरसे के दो मंजिला भवन के ध्वस्तीकरण का आदेश नियत प्राधिकारी एवं एसडीएम न्यायालय ने 13 जनवरी 2026 को पारित किया था। आरोप था कि विनियमित क्षेत्र में बिना मानचित्र स्वीकृत कराए भवन का निर्माण कराया गया। नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हुआ था।
इसके खिलाफ तौसीफ रजा ने पहले जिलाधिकारी और फिर मंडलायुक्त न्यायालय में अपील की, लेकिन दोनों स्तरों पर राहत नहीं मिली। 25 अप्रैल 2026 को मंडलायुक्त न्यायालय से अपील खारिज होने के बाद 26 अप्रैल को मदरसे पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई।
करीब 24 घंटे चली कार्रवाई में भवन का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा ढहा दिया गया। इसके अगले दिन 27 अप्रैल को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
मामले की तत्काल सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई स्थगित कर दी। भवन का शेष हिस्सा अभी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दायरे में है। इस संबंध में मामला हाईकोर्ट में लंबित है।
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