संतकबीर नगर: वैसे तो विकास विभाग में प्रधानमंत्री आवास रेवड़ी की तरह बांटे जा रहे हैं, लेकिन अब भी कई जरूरतमंदों को आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। इन गरीबों की रातें पक्का मकानों की आस में झोपड़ी व टूट-फूटे घरों में कट रही है। सांथा ब्लाक का फुलवरिया गांव, जहां कई लोग अभी भी झोपड़ी में रह रहे हैं। सभी पात्र हैं और इनका नाम सामाजिक, आर्थिक व जातिगत जनगणना (सेक) की सूची में शामिल है। इसके बाद भी लोगों को आवास नहीं मिल पा रहा है।

गांव की बेवा सकीबुन्निशा हैं। इनके पास सिर छुपाने के लिए जगह नहीं है। पति की मौत के बाद कोई सहारा भी नहीं है जो इनके दर्द को समझ सके। चार बच्चों के साथ छप्पर में पन्नी तानकर गुजर बसर कर रही हैं। सकीबुन्निशा ने प्रधान से लेकर ब्लाक के कर्मचारियों तक से आवास की आस में गुहार लगाई, लेकिन इनके हिस्से में बस आश्वासन है। वह कहती हैं कि जिनके घर पक्के हैं उन्हें तो योजना का लाभ मिल गया, लेकिन उनका पांच परिवार का कुनबा जैसे- तैसे दिन गुजार रहा है। सवाल खड़ा होता है कि आखिर पात्रता की श्रेणी निर्धारित करने वाले जिम्मेदारों को गरीबों का मकान क्यों नहीं दिखाई देता। इसी तरह से गांव के बलराम, सुभावती देवी, राम सुभग, जीतेंद्र, राहुल कुमार के पास भी छप्पर का मकान है। इन लोगों को भी आवास के लिए लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है। ग्रामीण कहते हैं कि आवास की सूची बनने के समय आवास मिलने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आवास आवंटित नहीं हुआ, जिससे छप्पर में ही रात काट रही है। पात्रों का कहना है कि जिनको आवास की सबसे ज्यादा जरूरत है, उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाना योजना के क्रियान्वयन पर सवाल है।

सांथा के बीडीओ महावीर सिंह ने कहा कि फुलवरिया गांव में गरीब परिवारों को आवास क्यों नहीं मिला, इसकी जानकारी कराई जाएगी। हर हाल में पात्रों को योजना का लाभ दिया जाएगा।

Edited By: Jagran