यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 14, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कच्ची के धंधेबाजों पर नहीं हो रही कार्रवाई
अभियान के नाम पर पुलिस व आबकारी विभाग सिर्फ कर रही खानापूति

संतकबीर नगर: कच्ची के धंधेबाजों पर कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदार खामोश हैं। बखिरा थानाक्षेत्र का डिहुलिया गांव इसका उदाहरण है। कच्ची के सेवन से इस गांव के 12 लोगों की मौत हो चुकी है। किसी बच्चे ने पिता को
खोया है तो किसी के मांग का सिदूर मिटा है। अभियान के नाम पर पुलिस और आबकारी विभाग के कर्मी सिर्फ खानापूर्ति करते हैं। यही वजह है कि इस गांव में सुबह से देर रात तक कच्ची बनाने और बेचने का धंधा चलता है। शराबियों की भीड़ से महिलाओं, बेटियों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। कच्ची के कारोबारी मुनाफा के लालच में लोगों को मौत के मुंह में झोंक रहे हैं। इस धंधे में महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस व आबकारी विभाग के कर्मी सिर्फ दिखावे के लिए बीच-बीच में छापेमारी करते हैं। छापा डालने के पूर्व धंधेबाजों को इसकी सूचना मिल जाती है। इसलिए इनके आने के पहले धंधेबाज फरार हो जाते हैं। कुछ बरामदगी दिखाकर व लहन नष्ट करके खानापूर्ति कर लेते हैं। इनके गांव से जाने के बाद पुन: धंधा तेजी से चलने लगता है। देसी की तुलना में कच्ची कम पैसे में मिल जाती है। देसी की तुलना में इसमें अधिक नशा भी होता है। इसलिए शराबी कच्ची का सेवन अधिक करते हैं। जबकि यह शराब घातक है। सड़े-गले अनाज, महुआ, गुड़ के अलावा यूरिया, नौसादर, स्प्रीट व नशीली दवाएं मिलाकर कच्ची बनाई जाती है। जिला आबकारी अधिकारी आरपी तिवारी ने कहा कि कच्ची बनाने व बेचने के कार्य पर नकेल कसने के लिए विभाग तत्पर रहता है। इसके धंधेबाजों के खिलाफ जल्द प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
