IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा: कोरोना संकट में संभाली थी संतकबीरनगर की कमान, जनसरोकार से जीता सबका दिल
तेरह साल की आईएएस यात्रा के बाद दिव्या मित्तल के इस्तीफे ने सबको चौंका दिया है, जिसके बाद संतकबीरनगर में ...और पढ़ें

संतकबीरनगर जिले की पूर्व डीएम दिव्या मित्तल
HighLights
कोरोना संकट और विकास चुनौतियों के बीच संभाली कमान।
सख्त प्रशासनिक फैसले, मानवीय संवेदनशीलता से बनाई पहचान।
जनता दर्शन में बुजुर्गों की समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया।
जागरण संवाददाता, संतकबीरनगर। तेरह साल की आइएएस यात्रा के बाद अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंकाने वालीं दिव्या मित्तल की संतकबीरनगर में दो साल की तैनाती को भुलाया नहीं जा सकता। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर, स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौती और विकास योजनाओं को गति देने के दबाव के बीच उन्होंने 11 सितंबर 2020 से 17 सितंबर 2022 तक जिले की कमान संभाली।
इस दौरान सख्त प्रशासनिक फैसलों के साथ उनकी संवेदनशील कार्यशैली भी चर्चा में रही। संत कबीर की धरती पर उनकी पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में बनी, जो समय की कीमत समझती थीं। लंबी-चौड़ी बातों के बजाय सीधे मुद्दे पर आने की अपेक्षा करती थीं।
बैठक में अधिकारी बात को खींचते तो उन्हें रोककर संक्षेप में तथ्य रखने को कहती थीं। कौन अधिकारी किस काम के लिए उपयुक्त है, इसे वह जल्दी परख लेती थीं और उसी के अनुरूप जिम्मेदारी सौंपती थीं। लापरवाही उनके लिए कतई स्वीकार्य नहीं थी।
जिसे जिम्मेदारी दी, उससे परिणाम भी चाहा
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक इसका उदाहरण बनी। कार्मिक प्रभारी एवं तत्कालीन सीडीओ अतुल मिश्र तैयारियों से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके तो उन्होंने तत्काल परियोजना निदेशक-डीआरडीए प्रमोद कुमार यादव को जिम्मेदारी सौंप दी।
तत्कालीन एडीएम वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार सिंह पर भी उनका भरोसा रहा। दोनों अधिकारी उनकी अपेक्षाओं पर खरे उतरे और चुनाव शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को कैंप कार्यालय में सम्मानित कर वह उनका उत्साह भी बढ़ाती थीं।
फरियादी की समस्या के साथ घर वापसी की भी चिंता
जनता दर्शन में आने वाले बुजुर्ग महिला-पुरुषों के प्रति उनकी संवेदनशीलता अलग दिखाई देती थी। समस्या सुनने और उसका निस्तारण कराने के साथ वह यह जरूर पूछती थीं कि फरियादी यहां कैसे आया और घर कैसे जाएगा। जरूरत पड़ने पर अपने पास से किराये के रुपये तक देती थीं। इससे जनता दर्शन में आने वाले लोगों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ा। अधिकारियों को भी शिकायतों को लंबित रखने में संकोच होता था।
दबाव आया तो साफ कहा—काम के बाद ही भुगतान
एक जनप्रतिनिधि समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और बिना कार्य कराए भुगतान का दबाव बनाया। दिव्या मित्तल ने साफ कहा कि जांच कराई जाएगी और कार्य होने के बाद ही सरकारी भुगतान होगा। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी दबाव में निर्णय नहीं बदलेंगी।
ईश्वर के प्रति उनकी गहरी आस्था भी रही। समय माता मंदिर, गायत्री शक्ति पीठ और तामेश्वरनाथ धाम में वह पूजन-अर्चन के लिए जाती थीं। प्रशासनिक सख्ती, त्वरित निर्णय और मानवीय संवेदना के इस मेल ने उनके कार्यकाल की अलग पहचान बनाई। 17 सितंबर 2022 को स्थानांतरण के बाद अब इस्तीफे की खबर के साथ जिले में उनके कार्यकाल की चर्चा फिर तेज हो गई हैं।
