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संभल हिंसा का सच आएगा बाहर: 19 नवंबर के सर्वे से 24 की गोलीबारी तक... इन 9 सवालों में छिपा है पूरा राज

Published: Tue, 11 Aug 2026 05:59 PM (IST)

संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा की जांच के लिए आयोग ने 9 महत्वपूर्ण सवाल तय किए हैं। ...और पढ़ें

संभल में हिंसा के बाद पैदल मार्च करते अधिकारी। जागरण आर्काइव

संभल में हिंसा के बाद पैदल मार्च करते अधिकारी। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. 19 नवंबर के सर्वेक्षण से 24 नवंबर की गोलीबारी तक की जोड़ी जाएंगी कड़ियां

  2. भीड़ जुटने, उकसावे, वजूखाने का पानी निकालने और प्रमुख लोगों की भूमिका पर भी रहेगा फोकस

संवाद सहयोगी, बहजोई (संभल)। संभल में 24 नवंबर 2024 को भड़की हिंसा को अचानक हुई घटना मानकर छोड़ने के बजाय उसके पीछे की पूरी कड़ी तलाशने की कोशिश जांच आयोग की रिपोर्ट में दिखाई देती है। आयोग ने साक्ष्यों, अभिलेखों और उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल के बाद नौ ऐसे सवाल तय किए हैं, जिनके जवाब से हिंसा से पहले बने माहौल और घटना के दिन की परिस्थितियों की तस्वीर साफ होगी।

जांच की शुरुआत 19 नवंबर को जामा मस्जिद के सर्वेक्षण से होगी। आयोग यह जानने का प्रयास किया कि उस दिन सर्वेक्षण पूरा हुआ था या नहीं और इसके बाद 21 नवंबर को पुलिस प्रशासन ने शांति समिति की बैठक की थी या नहीं।

इसके बाद 22 नवंबर का घटनाक्रम भी जांच का अहम हिस्सा है। आयोग यह देखना चाह कि जुमे की नमाज के लिए नमाजियों को बड़ी संख्या में जामा मस्जिद आने और स्थानीय मस्जिदों के बजाय यहीं नमाज पढ़ने के लिए बुलाया गया था या नहीं।

नमाज के बाद सांसद जिया-उर-रहमान बर्क ने जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर नमाजियों और मीडिया को संबोधित किया था या नहीं, इसके साक्ष्यों का भी परीक्षण होना चाहिए।

23 नवंबर को जामा मस्जिद के सदर अधिवक्ता जफर अली को अगले दिन होने वाले सर्वेक्षण की जानकारी कब और किस तरह दी गई, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है। 24 नवंबर को सर्वेक्षण के दौरान वजूखाने का पानी निकाले जाने की कार्रवाई किसके निर्देश पर हुई, इसकी भी पड़ताल होनी चाहिए।

इसके साथ 19, 22 और 24 नवंबर को भीड़ जुटने के उद्देश्य और उसे उकसाने वाले कारणों की तलाश होनी चाहिए। आयोग यह भी तय हो कि 24 नवंबर की हिंसा वास्तव में अचानक भड़की थी या उसके पीछे पहले से परिस्थितियां तैयार हो रही थीं।

जामा मस्जिद इंतेजामिया समिति के सदस्यों, सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और स्थानीय विधायक के पुत्र व प्रतिनिधि सुहेल इकबाल के बयानों और साक्ष्यों को भी जांच में परखा जाए। इन सभी कड़ियों को जोड़कर आयोग हिंसा के पीछे के कारणों तक पहुंचने का प्रयास हो

साक्ष्य के अनुसरण में निर्धारण के बिंदु

साक्ष्यों की जांच, रिकॉर्ड/दस्तावेजों के बाद, आयोग इसे उचित समझता है कि सौंपे गए संदर्भ बिन्दु का उत्तर देने से पहले निर्धारण के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को तैयार करे:

  • क्या सर्वेक्षण दिनांक 19.11.2024 को पूरा हुआ या नहीं?
  • क्या जिला पुलिस प्रशासन द्वारा दिनांक 21.11.2024 को शांति समिति की कोई बैठक आयोजित की गई थी?
  • क्या नमाजियों को दिनांक 22.11.2024 को जुम्मे की नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में जामा मस्जिद पर आने और अपनी स्थानीय मस्जिद के बजाय वहां नमाज अदा करने के लिए बुलाया गया था? और क्या संसद सदस्य, श्री जिया-उर-रहमान बर्क ने दिनांक 22.11.2024 को जुम्मा नमाज के बाद जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर नमाजियों और मीडिया को संबोधित किया?
  • क्या जामा मस्जिद के सदर, अधिवक्ता श्री जफर अली को दिनांक 23.11.2024 को अदालत परिसर में दिन के दौरान अधिवक्ता आयुक्त द्वारा दिनांक 24.11.2024 के लिए निर्धारित सर्वेक्षण की तारीख व समय के बारे में सूचित किया गया था? और क्या जिला प्रशासन ने अतिरिक्त रूप से जामा मस्जिद के सदर, अधिवक्ता श्री जफर अली को दिनांक 23.11.2024 की शाम को अधिवक्ता आयुक्त द्वारा शेष सर्वेक्षण के लिए नोटिस के अनुसरण में सूचित किया?
  • क्या दिनांक 24.11.2024 को सर्वेक्षण के दौरान वजूखाना (एब्लूशन टैंक) का पानी निकाला गया था, यदि हां, तो किसके निर्देश पर और किसके द्वारा?
  • क्या 19, 22 और दिनांक 24.11.2024 की तारीखों पर कोई भीड़ किसी विशेष उद्देश्य के लिए इकट्ठी हुई थी और यदि हां, तो किसके उकसावे पर?
  • क्या दिनांक 24.11.2024 की हिंसा की घटना अचानक थी?
  • जामा मस्जिद की इंतेजामिया समिति के सदस्यों, माननीय स्थानीय सांसद श्री जिया-उर-रहमान और स्थानीय विधायक के पुत्र और प्रतिनिधि सुहेल इकबाल के साक्ष्य का मूल्यांकन।
  • दिनांक 24.11.2024 की घटना के पीछे के कारण?

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