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संभल हिंसा मामला: 148 आरोपी गिरफ्तार, 74 उपद्रवियों के पोस्टर जारी होने के बाद भी सुराग नहीं

Published: Tue, 29 Sep 2026 10:41 PM (IST)

संभल हिंसा मामले में अब तक 148 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 12 मुकदमे दर्ज हुए थे। ...और पढ़ें

संभल हिंंसा की फाइल फोटो

संभल हिंंसा की फाइल फोटो

HighLights

  1. कुल 12 मुकदमे हुए थे दर्ज, करीब 3,750 अज्ञात और 37 नामजद आरोपितों को किया गया चिह्नित, कार्रवाई जारी

संवाद सहयोगी, संभल। हिंसा के मामले में पुलिस की कार्रवाई अब न्यायालय में चल रही प्रक्रिया पर केंद्रित है। पुलिस अब तक 148 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इनमें अधिकांश को न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। वहीं 12 मुकदमों में से कई में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किए जा चुके हैं, जबकि शेष मामलों में विवेचना और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। मुल्ला अफरोज के अलावा शारिक साठा के गुर्गे वारिस और गुलाम मोहम्मद पर भी रासुका लगी हुई है।

हिंसा के बाद पुलिस ने कुल 12 मुकदमे दर्ज किए। इनमें करीब 3,750 अज्ञात और 37 नामजद आरोपितों को चिह्नित किया गया। जांच के लिए एसआईटी गठित की गई।

हिंसा प्रभावित क्षेत्र से पाकिस्तान और अन्य देशों में निर्मित कारतूस भी मिले थे। विवेचना के दौरान जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली, सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क समेत कई लोगों के नाम सामने आए।

sambhal hinsa

विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल का नाम भी एक समय जांच में सामने आया था, लेकिन विवेचना के बाद पुलिस ने उसका नाम मामले से बाहर कर दिया था।

एसआईटी की पूछताछ के बाद जफर अली को 23 मार्च 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। करीब 131 दिन जेल में रहने के बाद उन्हें एक अगस्त 2025 को जमानत मिल गई थी।

इसके बाद अन्य आरोपितों को भी अलग-अलग न्यायालयों से राहत मिली। सुप्रीम कोर्ट से भी हिंसा से जुड़े तीन आरोपितों को जमानत मिलने का मामला सामने आया था।

एसआईटी ने हिंसा से जुड़े सभी मुकदमों में न्यायालय के समक्ष आरोपपत्र दाखिल कर दिए हैं। फरवरी 2025 में चार मुकदमों में 124 आरोपितों के खिलाफ करीब 1,200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी।

उधर, हिंसा के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और ड्रोन की मदद से सभी आरोपितों की पहचान की थी। जिसमें 74 उपद्रवियों की पहचान के लिए शहर के अलावा अन्य जिलों में भी उनके पोस्टर जारी किए गए थे।

पुलिस और एसओजी की टीमों ने उनकी तलाश में दिल्ली, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों व जिलों में दबिश दी थी, लेकिन उनका कहीं भी पता नहीं चल सका। जिसके बाद पुलिस ने उनकी फाइल बंद कर दी।

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